18.20

संस्कृत

सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते । अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम् ॥ २० ॥

sarvabhūteṣu yenaikaṃ bhāvam avyayam īkṣate avibhaktaṃ vibhakteṣu tajjñānaṃ viddhi sāttvikam

अनुवाद

जिस ज्ञान के द्वारा मनुष्य सब प्राणियों में एक ही अविनाशी भाव को देखता है, बँटे हुओं में भी उसे अविभक्त देखता है, उस ज्ञान को तुम सात्त्विक जानो।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

सात्त्विक ज्ञान की परिभाषा यह है कि वह उन सभी प्राणियों में, जो अलग-अलग प्रतीत होते हैं, एक ही अविनाशी सत्ता को अविभक्त रूप में देखता है — एक अद्वैत दृष्टि, जो अनेकता के पार एकता को देखती है। मूलतः यह अध्याय 13 की चरम अंतर्दृष्टि है, यानी हर जगह उसी एक क्षेत्रज्ञ को पहचानना। यहाँ इसे किसी स्वतंत्र अनुभूति के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान के त्रिविध सिद्धांत के सर्वोच्च स्तर के रूप में नए ढंग से प्रस्तुत किया गया है। सात्त्विक ज्ञान अनेक में एक अविभक्त सत्ता को देखता है — गीता 13.16–गीता 13.17 का “अविभक्त, फिर भी मानो विभक्त-सा स्थित”, और गीता 6.29 की समदृष्टि। यही वह दृष्टि है जिसकी ओर पूरी गीता संकेत करती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

sarvabhūteṣu yenaikaṃसर्वभूतेषु येनैकं
जिसके द्वारा सभी प्राणियों में एक (sarva-bhūteṣu + yena-ekam)
bhāvam avyayam īkṣateभावं अव्ययं ईक्षते
अविनाशी भाव को देखता है (bhāvam + avyayam + īkṣate)
avibhaktaṃ vibhakteṣuअविभक्तं विभक्तेषु
विभक्तों में अविभक्त (avibhaktam + vibhakteṣu)
tajjñānaṃ viddhi sāttvikamतज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकं
उस ज्ञान को सात्त्विक जानो (tat-jñānam + viddhi + sāttvikam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

“Undivided in the separated” is doing careful philosophical work: it’s not claiming the many beings are secretly connected by some external thread, but that the one reality is completely present inside each apparently separate thing, without division at all. That’s a much stronger and stranger claim than ordinary talk of everything being “connected” — connection implies two things linked; this verse is describing one thing that was never actually two to begin with.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप लोगों से या प्रकृति से जुड़ाव का अनुभव करें, तो इस अंतर पर ध्यान दें: एक बात है किसी अलग चीज़ से जुड़ा हुआ महसूस करना, और दूसरी बात है यह प्रश्न करना कि क्या वह अलगाव कभी पूरी तरह वास्तविक था भी। जुड़ाव का अधिक गहरा और अधिक अनोखा रूप कोई अधिक मज़बूत बंधन नहीं है — वह तो सबसे पहले उस सीमा पर ही संदेह करना है।

व्यावसायिक

  • अपनी टीम के अलग-अलग खानों को ऐसी अलग इकाइयाँ मानने के बजाय, जो काम सौंपने और स्थिति-बैठकों के ज़रिए 'जुड़ी' हुई हैं, इस पर विचार करें कि संगठन-चार्ट का यह विभाजन शायद वास्तविक से अधिक बनावटी है — आप एक साझा परिणाम वाली एक ही व्यवस्था हैं, न कि प्रक्रिया से जुड़ी कई टीमें। काल्पनिक विभाजनों के बीच के जुड़ावों को सुधारने से बेहतर है कि आपसी निर्भरता को जड़ से ठीक किया जाए।

परिवार और समाज

  • परिवार के जिस सदस्य से आप दूर हो गए हैं, उससे 'अधिक जुड़ा हुआ' महसूस करने की कोशिश करने के बजाय यह प्रश्न करें कि क्या आप दोनों के बीच अलगाव का भाव कभी उतना वास्तविक था जितना वह लगता है — कभी-कभी यह दूरी वास्तविक कम और मानी हुई अधिक होती है, जो सच्ची दूरी से नहीं बल्कि भूमिकाओं से बनी होती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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