संस्कृत
न द्वेष्ट्यकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते । त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशयः ॥ १० ॥
na dveṣṭy akuśalaṃ karma kuśale nānuṣajjate tyāgī sattvasamāviṣṭo medhāvī chinnasaṃśayaḥ
अनुवाद
सत्त्व से परिपूर्ण, मेधावी और संशयों से मुक्त त्यागी न तो अप्रिय कर्म से द्वेष करता है और न ही प्रिय कर्म में आसक्त होता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण इस सात्त्विक त्यागी का मनोवैज्ञानिक चित्र खींचते हैं: शुद्ध, बुद्धिमान, संशय से मुक्त, और — जो बहुत कुछ कह जाता है — ऐसा व्यक्ति जो न अप्रिय कर्तव्य से द्वेष करता है और न प्रिय कर्तव्य से चिपका रहता है। स्वयं कार्य के प्रति यह समभाव, इस बात से स्वतंत्र कि वह संयोग से रुचिकर है या नहीं, वही समता है जिसकी माँग अध्याय 2 ने परिणामों के प्रति की थी, पर यहाँ उसे कार्य के अनुभव किए जाने वाले स्वरूप पर ले आया गया है। सच्चे त्यागी की पहचान: अप्रिय कार्य के प्रति कोई अरुचि नहीं, प्रिय कार्य से कोई चिपकाव नहीं — गीता 2.57 का “न हर्षित होता है, न पीछे हटता है”, अब त्याग की परिभाषा बन गया है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- na dveṣṭy akuśalaṃ karmaन द्वेष्ट्य् अकुशलं कर्म
- वह अप्रिय कर्म से द्वेष नहीं करता (na + dveṣṭi + akuśalam + karma)
- kuśale nānuṣajjateकुशले नानुषज्जते
- और न प्रिय में आसक्त होता है (kuśale + na + anuṣajjate)
- tyāgī sattvasamāviṣṭoत्यागी सत्त्वसमाविष्टो
- सत्त्व से युक्त त्यागी (tyāgī + sattva-samāviṣṭaḥ)
- medhāvī chinnasaṃśayaḥमेधावी छिन्नसंशयः
- बुद्धिमान, जिसका संशय कट चुका है (medhāvī + chinna-saṃśayaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The profile is drawn entirely in negatives — doesn’t hate the unpleasant task, isn’t attached to the pleasant one — with no positive description of what this person actually feels while working supplied at all. Defining a state by what it refuses on both sides, rather than by any feeling it does have, is the same move avyakta gets defined by elsewhere in this text: some things in the Gita are easier to point at by what they aren’t than by what they are.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जो काम आपको नापसंद है, उसके प्रति ज़बरदस्ती कोई अच्छी भावना गढ़ने की ज़रूरत नहीं है — अपना लक्ष्य यह रखना काफ़ी है कि 'न उस काम से डरूँ, न किसी मज़ेदार विकल्प की लालसा करूँ', और अक्सर यह ख़ुद को उस काम के बारे में अच्छा महसूस करने के लिए मजबूर करने से ज़्यादा संभव होता है।
व्यावसायिक
- अपने काम के बोझ पर भी यही दोहरा 'न-न' वाला मानदंड लागू करें: लक्ष्य यह हो कि न उबाऊ टिकटों से खीझें और न रोमांचक टिकटों से ज़रूरत से ज़्यादा जुड़ जाएँ। काम के प्रति यही संतुलित भाव, न कि हर काम के लिए गढ़ा हुआ प्रेम, असल में काम पर स्थिरता का रूप है।
परिवार और समाज
- घर के कामों में, उबाऊ कामों के लिए उत्साह महसूस करने या मज़ेदार कामों को पसंद करने पर अपराध-बोध महसूस करने की कोशिश न करें — लक्ष्य यह रखें कि न एक से खीझें और न दूसरे की लालसा करें, और उस संतुलित भाव को वह काम करने दें जिसका श्रेय आमतौर पर समभाव को दिया जाता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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