संस्कृत
शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम् । दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम् ॥ ४३ ॥
śauryaṃ tejo dhṛtir dākṣyaṃ yuddhe cāpy apalāyanam dānam īśvara-bhāvaś ca kṣātraṃ karma svabhāvajam
अनुवाद
शौर्य, तेज, धैर्य, दक्षता, युद्ध से कभी न भागना, दान और स्वामिभाव — ये क्षत्रिय के स्वभाव से उत्पन्न कर्म हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
पराक्रम, तेज, धैर्य, युद्ध से न भागना, उदारता, शासक की-सी गरिमा — यह एक-एक बात में उसी का वर्णन है जो अर्जुन पहले से है, और जिसे न छोड़ने का तर्क पूरा काव्य देता आया है। ग्रंथ में इतनी देर से आने के कारण यह श्लोक अध्याय 1 की एक शांत याद दिलाता है: जिन गुणों को अर्जुन ने 1.47 में अपने धनुष के साथ नीचे रख दिया था, उन्हीं को यहाँ उसका जन्मसिद्ध अधिकार बताया गया है। ये तर्क के लिए गौण नहीं हैं, बल्कि उसका वह निष्कर्ष हैं जो बहुत समय से टलता आ रहा था। क्षत्रिय का स्वधर्म — यानी अर्जुन का — बाहर की ओर और सक्रिय है: शौर्य (साहस), अपलायन (युद्ध से न भागना), ईश्वर-भाव (नेतृत्व करने वाले की गरिमा)। काव्य के अंत में यह गीता 2.31–गीता 2.37 की ही बात है, जो उस संकट का उत्तर देती है जिससे काव्य आरंभ हुआ था।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- śauryaṃ tejo dhṛtir dākṣyaṃशौर्यं तेजो धृतिः दाक्ष्यं
- शूरवीरता, तेज, धैर्य, दक्षता (śauryam + tejaḥ + dhṛtiḥ + dākṣyam)
- yuddhe cāpy apalāyanamयुद्धे चाप्य् अपलायनं
- और युद्ध में भी न भागना (yuddhe + ca + api + apalāyanam)
- dānam īśvara-bhāvaś caदानं ईश्वर-भावश् च
- दान और स्वामिभाव (dānam + īśvara-bhāvaḥ + ca)
- kṣātraṃ karma svabhāvajamक्षात्रं कर्म स्वभावजं
- क्षत्रिय के स्वभाव से उत्पन्न कर्म हैं (kṣātram + karma + svabhāva-jam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Generosity, dana, sits inside a list otherwise built from combat and command, prowess, refusal to flee, a ruler’s bearing, and its placement isn’t incidental. The verse doesn’t treat raw fighting capability as sufficient for the Kshatriya role; it binds the capacity to dominate directly to an obligation to give. Power without an accompanying practice of generosity doesn’t make this list.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- यदि किसी क्षेत्र में आपके पास वास्तविक क्षमता या अधिकार है, जैसे विशेषज्ञता, शक्ति या प्रभाव, तो उसमें से कुछ दूसरों को देने के दायित्व को — जैसे मार्गदर्शन, समय या संसाधन देना — उस क्षमता का ही हिस्सा मानें, न कि कोई अलग गुण जिसे आप बाद में चाहें तो अपना लें।
व्यावसायिक
- दबाव में कठिन निर्णय लेने का नेता का अधिकार इस सूची में बताई गई बातों का केवल आधा भाग है; दूसरा आधा भाग उदारता है: खुलकर श्रेय देना, संसाधन बाँटना, दूसरों को आगे बढ़ाने के लिए उनका साथ देना। उदारता के बिना आदेश देने की क्षमता नेतृत्व की एक अधूरी तस्वीर है।
परिवार और समाज
- परिवार की किसी स्थिति में सबसे सशक्त या सबसे सक्षम व्यक्ति होने के साथ ही यह अपेक्षा भी जुड़ी होती है कि आप उन लोगों के प्रति उदार रहें जिनकी क्षमता इस समय कम है। यहाँ ये दो अलग गुण नहीं हैं, ये एक ही भूमिका हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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