संस्कृत
अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः । विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते ॥ २८ ॥
ayuktaḥ prākṛtaḥ stabdhaḥ śaṭho naiṣkṛtiko'lasaḥ viṣādī dīrghasūtrī ca kartā tāmasa ucyate
अनुवाद
जो कर्ता असंयमी, असंस्कृत, हठी, धूर्त, दूसरों का अहित करने वाला, आलसी, विषादग्रस्त और काम को टालते रहने वाला है, वह तामस कहलाता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
तामसिक कर्ता अनुशासनहीन, असभ्य, हठी, कपटी, द्वेषपूर्ण, आलसी, विषाद में डूब जाने वाला और आदतन टालमटोल करने वाला होता है — यह इस प्रसंग की सबसे लंबी और सबसे बारीक दोष-सूची है। इससे लगता है कि तमस् को सबसे स्पष्ट रूप से नाम देना सबसे ज़रूरी माना गया, शायद इसलिए कि इसके लक्षणों को किसी आध्यात्मिक श्रेणी के बजाय साधारण व्यक्तिगत कमी समझ बैठना कहीं आसान होता है। तामसिक कर्ता: ढह चुके संकल्प का नौ शब्दों वाला चित्र — स्तब्ध (न झुकने वाला), शठ (कुटिल), अलस (निठल्ला), विषादी (हताश — अध्याय 1 में अर्जुन का अपना शब्द), दीर्घसूत्री (हर काम को खींचते जाने वाला)। जड़ता का गुण।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- ayuktaḥ prākṛtaḥ stabdhaḥअयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः
- असंयमी, असंस्कृत, अकड़ा हुआ (ayuktaḥ + prākṛtaḥ + stabdhaḥ)
- śaṭho naiṣkṛtiko'lasaḥशठो नैष्कृतिकोऽलसः
- धूर्त, दूसरों का अहित करने वाला, आलसी (śaṭhaḥ + naiṣkṛtikaḥ + alasaḥ)
- viṣādī dīrghasūtrī caविषादी दीर्घसूत्री च
- विषादग्रस्त और टालमटोल करने वाला (viṣādī + dīrgha-sūtrī + ca)
- kartā tāmasa ucyateकर्ता तामस उच्यते
- ऐसा कर्ता तामस कहा जाता है (kartā + tāmasaḥ + ucyate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Where the rajasic list in the previous verse closes on a symptom of movement, joy tipping into sorrow and back, this one closes on a symptom of standstill: chronic procrastination, dirgha-sutri, literally long-threaded. The two catalogues aren’t just longer or shorter versions of the same failure; they diagnose opposite malfunctions, one an actor who moves too reactively, the other one who barely moves at all.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- यदि आप अपने भीतर दो तरह की विफलताओं के बीच अटके हुए हैं, एक तो हर परिणाम के साथ प्रतिक्रिया में डोलते रहना, और दूसरी वह पुरानी टालमटोल जो कभी ठीक से शुरू ही नहीं होती, तो पहचानिए कि आप वास्तव में किसे देख रहे हैं। अस्थिरता का उपाय और जड़ता का उपाय एक नहीं हैं।
व्यावसायिक
- जो परियोजना हमेशा बस शुरू होने ही वाली रहती है, उसका मूल कारण उस परियोजना के मूल कारण से अलग होता है जो एक दिशा-परिवर्तन से दूसरे के बीच छटपटाती रहती है। यह तय करने से पहले कि हस्तक्षेप शुरू करने के लिए धक्का हो या स्थिर होने के लिए ठहराव, पहले पहचानिए कि समस्या ठहराव की है या उथल-पुथल की।
परिवार और समाज
- परिवार का जो सदस्य किसी निर्णय पर कभी आगे बढ़ता ही नहीं दिखता, उसकी समस्या वैसी नहीं है जैसी उस सदस्य की जो हर नई घटना पर प्रतिक्रिया करता है। ठहराव और अस्थिरता को अलग-अलग स्थितियाँ मानिए, जिनके लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया चाहिए।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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