संस्कृत
यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन् कार्ये सक्तमहैतुकम् । अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम् ॥ २२ ॥
yat tu kṛtsnavad ekasmin kārye saktam ahaitukam atattvārthavad alpaṃ ca tat tāmasam udāhṛtam
अनुवाद
किंतु जो किसी एक ही कार्य से ऐसे चिपका रहता है मानो वही सब कुछ हो, जो युक्ति से रहित है, तत्त्व के अर्थ को नहीं पकड़ता और तुच्छ है, वह तामस कहा गया है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
तामसिक ज्ञान किसी एक छोटी, विशेष वस्तु से ऐसे चिपक जाता है मानो वही सब कुछ हो — वह तर्कहीन होता है, सत्य पर आधारित नहीं होता, और संकीर्ण होता है। यहाँ चूक इस अर्थ में अज्ञान की नहीं है कि कुछ भी न जाना जाए; यह एक प्रकार का अदूरदर्शी अति-लगाव है: किसी अंश को ही पूर्णता समझ लेना — जो श्लोक 20 की उस क्षमता का ठीक उल्टा है, जिसमें हर अंश के भीतर पूर्णता को देखा जाता है। तामसिक ज्ञान: एक ही वस्तु पर ऐसे टिक जाना “मानो वही सब कुछ हो”, अहैतुकम्, बिना कारण या तर्क के। संकीर्ण, विचारहीन, और अल्प, यानी छोटा। बंद मन का गुण।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yat tu kṛtsnavadयत् तु कृत्स्नवद्
- परन्तु जो, मानो वही सम्पूर्ण हो, इस प्रकार (yat + tu + kṛtsna-vat)
- ekasmin kārye saktamएकस्मिन् कार्ये सक्तं
- किसी एक ही कार्यरूप वस्तु में आसक्त (ekasmin + kārye + saktam)
- ahaitukam atattvārthavad alpaṃअहैतुकं अतत्त्वार्थवद् अल्पं
- युक्तिरहित, तत्त्वार्थ से रहित, तुच्छ (ahaitukam + atattva-artha-vat + alpam)
- ca tat tāmasam udāhṛtamच तत् तामसं उदाहृतं
- और वह तामस कहा गया है (ca + tat + tāmasam + udāhṛtam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This is verse 20 run backward: sattvic knowledge saw the undivided whole inside every fragment, tamasic knowledge clings to one fragment as though it were the entire whole. Same part-to-whole relationship, opposite error — which is a useful diagnostic, since it means the fix for tamasic narrowness was already stated two verses earlier: not more facts about the one thing you’re fixated on, but a wider frame that shows how it relates to everything else.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी एक बात में उलझकर रह जाते हैं — कोई एक बुरी समीक्षा, कोई एक अस्वीकृति — तो उसी एक बात का और विश्लेषण करने से यह उलझन दूर नहीं होगी। असल में जो मदद करता है, वह है सोच-समझकर अपना दायरा बड़ा करना, ताकि आप देख सकें कि वह बात उस कहीं बड़ी तस्वीर में कहाँ बैठती है, जिसका वह वास्तव में हिस्सा है।
व्यावसायिक
- जब कोई टीम किसी एक मापदंड या किसी एक घटना पर इस तरह अटक जाए मानो वही पूरी व्यवस्था की सेहत तय करती हो, तो जवाब में उसी सीमित चीज़ के बारे में और ब्योरे न जुटाएँ — सोच-समझकर दायरा बड़ा करें और दिखाएँ कि उसका बड़ी तस्वीर से क्या संबंध है। संकीर्ण दृष्टि का इलाज ज़्यादा चौड़ा लेंस है, ज़्यादा पैना नहीं।
परिवार और समाज
- जब आपका कोई क़रीबी किसी एक टिप्पणी या घटना पर इस तरह अटक जाए मानो वही पूरे रिश्ते को परिभाषित करती हो, तो इसका उपाय उस एक पल का और विश्लेषण करना नहीं है — उपाय है धीरे से दायरे को फिर से उस पूरे रिश्ते तक बड़ा करना, जिसका वह पल वास्तव में एक छोटा-सा हिस्सा है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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