18.23

संस्कृत

नियतं सङ्गरहितमरागद्वेषतः कृतम् । अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते ॥ २३ ॥

niyataṃ saṅgarahitam arāgadveṣataḥ kṛtam aphalaprepsunā karma yat tat sāttvikam ucyate

अनुवाद

जो कर्म नियत है, जो आसक्ति से रहित होकर, बिना राग और द्वेष के, फल की इच्छा न रखने वाले के द्वारा किया जाता है, वह सात्त्विक कहलाता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

अब स्वयं कर्म की ओर आते हैं: सात्त्विक कर्म वह कर्तव्य है जो विधि के अनुसार किया जाए, उसके फल की इच्छा से मुक्त हो, और उसके प्रति न आसक्ति हो न द्वेष। यह लगभग शब्दशः वही बात दोहराता है जिसे श्लोक 9 ने सात्त्विक त्याग कहा था — इससे यह पुष्टि होती है कि “सही कर्म” और “त्याग का सही ढंग” एक ही आचरण को दो अलग-अलग कोणों से बताते हैं। सात्त्विक कर्म: विहित, अराग-द्वेषतः किया गया, जिसमें पसंद-नापसंद की प्रतिक्रिया जड़ से ही हटा दी गई हो (गीता 2.64), और जिसे वह करे जो फल नहीं चाहता।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

niyataṃ saṅgarahitamनियतं सङ्गरहितं
नियत, आसक्ति से रहित (niyatam + saṅga-rahitam)
arāgadveṣataḥ kṛtamअरागद्वेषतः कृतं
राग-द्वेष के बिना किया गया (a-rāga-dveṣataḥ + kṛtam)
aphalaprepsunā karma yatअफलप्रेप्सुना कर्म यत्
फल न चाहने वाले द्वारा जो कर्म (a-phala-prepsunā + karma + yat)
tat sāttvikam ucyateतत् सात्त्विकं उच्यते
वह सात्त्विक कहा जाता है (tat + sāttvikam + ucyate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Verse 9 asked only for attachment and fruit to be relinquished; this verse quietly completes the pair by explicitly naming the other side too — action done “without love or hate” (arāga-dveṣataḥ). Non-attachment was never only about resisting the pull toward what you want; verse 23 makes clear it equally means resisting the push away from what you don’t want, a symmetry easy to miss if you’d only read verse 9’s version of the same standard.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • ध्यान दें कि जो काम आपको नापसंद है, उससे बचना उसी तंत्र पर चलता है जिस पर किसी मनचाहे काम के पीछे भागना चलता है — दोनों में मन आपको आपके केंद्र से हटा रहा होता है, बस उलटी दिशाओं में। सच्ची अनासक्ति का अर्थ है नापसंद चीज़ से दूर धकेले जाने का भी उतना ही विरोध करना जितना पसंदीदा चीज़ की ओर खिंचने का।

व्यावसायिक

  • किसी ऐसे क्लाइंट या काम से कतराना जो आपको अप्रिय लगता है, उसी प्रकार की आसक्ति है — बस उलटी — जैसी अपने पसंदीदा प्रोजेक्ट में ज़रूरत से ज़्यादा डूब जाना। अनासक्ति को केवल अपनी इच्छाओं पर लागू करना और अपनी अरुचियों को खुली छूट देना अनासक्ति नहीं है — यह वही असंतुलन है, बस दूसरी ओर से।

परिवार और समाज

  • किसी अप्रिय पारिवारिक दायित्व से नापसंदगी के कारण बचना उसी तंत्र पर चलता है जिस पर किसी सुखद दायित्व को ज़रूरत से ज़्यादा तरजीह देना चलता है — दोनों में आप अपने प्रयास का निर्णय वास्तविक आवश्यकता को नहीं, बल्कि किसी खिंचाव को लेने देते हैं। सच्ची समता का अर्थ है दोनों के साथ एक जैसा व्यवहार करना, न कि केवल अपनी पसंद की चीज़ों के प्रति खिंचाव का विरोध करना।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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