संस्कृत
सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः । इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम् ॥ ६४ ॥
sarva-guhyatamaṃ bhūyaḥ śṛṇu me paramaṃ vacaḥ iṣṭo'si me dṛḍham iti tato vakṣyāmi te hitam
अनुवाद
सबसे अधिक गोपनीय मेरा परम वचन फिर से सुनो। तुम मुझे अत्यन्त प्रिय हो, इसलिए मैं तुम्हारे हित की बात कहूँगा।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
आगे की बात कहने से पहले कृष्ण रुककर उसका कारण बताते हैं: अर्जुन उन्हें प्रिय है और दृढ़ है, इसलिए यह अंतिम वचन “तेरे हित के लिए” कहा जाएगा। यह श्लोक एक छोटी-सी कड़ी है, पर कहने के ढंग की दृष्टि से इसका महत्त्व है — कृष्ण जो सबसे कठिन बात कहने जा रहे हैं, उसे पहले संबंध से दिए गए उपहार के रूप में रखा जाता है, अधिकार से जारी किए गए आदेश के रूप में नहीं। सर्व-गुह्यतम — “सबसे गुप्त”, इस सूत्र की अंतिम कड़ी (गीता 9.1, गीता 15.20)। और इसे कहे जाने का कारण: इष्टोऽसि मे दृढम् — “तू मुझे दृढ़ता से प्रिय है।” अंतिम उपदेश प्रेम का उपहार है, सिद्धांत नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- sarva-guhyatamaṃ bhūyaḥ śṛṇuसर्व-गुह्यतमं भूयः शृणु
- सबसे अधिक गोपनीय, फिर से सुनो (sarva-guhya-tamam + bhūyaḥ + śṛṇu)
- me paramaṃ vacaḥमे परमं वचः
- मेरा परम वचन (me + paramam + vacaḥ)
- iṣṭo'si me dṛḍham itiइष्टोऽसि मे दृढं इति
- तुम मुझे अत्यन्त प्रिय हो, इसलिए (iṣṭaḥ + asi + me + dṛḍham + iti)
- tato vakṣyāmi te hitamततो वक्ष्यामि ते हितं
- अतः मैं तुम्हारे हित की बात कहूँगा (tataḥ + vakṣyāmi + te + hitam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna gives two reasons, not one: Arjuna is dear to him, and Arjuna is steadfast. Affection alone might have been sentiment; steadfastness alone might have been mere capability. Together they form the actual precondition for what’s coming — the hardest teaching is offered only where both real relationship and real readiness are present at once.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- किसी की कठिन माँग स्वीकार करने से पहले देखें कि क्या उसके साथ आपके प्रति सच्ची परवाह भी है और इस बात का प्रमाण भी कि उन्होंने आपको पहले कठिन परिस्थितियाँ सँभालते देखा है — यही मेल, न कि इनमें से कोई एक अकेले, किसी माँग को भरोसे लायक बनाता है।
व्यावसायिक
- किसी को अपनी सबसे खरी और कठिन प्रतिक्रिया देने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका उनसे सच्चा संबंध भी है और उनकी स्थिरता का प्रमाण भी — इनमें से कोई एक अकेले उस हद तक जाने का पर्याप्त आधार नहीं है।
परिवार और समाज
- परिवार के किसी सदस्य से कोई कठिन बात माँगने से पहले जाँच लें कि आपके मन में उनके लिए सच्चा स्नेह भी है और उनकी स्थिरता पर भरोसा भी — इस श्लोक की तरह दोनों को स्पष्ट रूप से कह देने से आपकी माँग दबाव नहीं, बल्कि परवाह के रूप में पहुँचती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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