18.62

संस्कृत

तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत । तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम् ॥ ६२ ॥

tam eva śaraṇaṃ gaccha sarva-bhāvena bhārata tat-prasādāt parāṃ śāntiṃ sthānaṃ prāpsyasi śāśvatam

अनुवाद

हे भारत, सम्पूर्ण भाव से केवल उसी की शरण में जाओ। उसकी कृपा से तुम परम शान्ति और शाश्वत धाम को प्राप्त करोगे।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

“सम्पूर्ण भाव से उसी की शरण में जाओ” — इस समापन क्रम में शब्द शरणम्, यानी आश्रय या शरण, यहाँ पहली बार आता है और अध्याय के सबसे निर्णायक क्षण, श्लोक 66 में, फिर से आएगा। यह पंक्ति अभी पूरा आदेश नहीं दे रही, बल्कि आगे आने वाली बात के लिए शब्दावली तैयार कर रही है। तम् एव शरणं गच्छ सर्वभावेन — “अपने सम्पूर्ण अस्तित्व से उसी की शरण लो।” यह वह उपदेश है जो यंत्र वाली छवि के ठीक बाद आता है: जो प्रभु आपको घुमाता है, उसी के प्रति परम शांति के लिए समर्पण करना है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

tam eva śaraṇaṃ gacchaतं एव शरणं गच्छ
उसी की शरण में जाओ (tam + eva + śaraṇam + gaccha)
sarva-bhāvena bhārataसर्व-भावेन भारत
हे भारत, सम्पूर्ण भाव से (sarva-bhāvena + bhārata)
tat-prasādāt parāṃ śāntiṃतत्-प्रसादात् परां शान्तिं
उसकी कृपा से परम शान्ति (tat-prasādāt + parām + śāntim)
sthānaṃ prāpsyasi śāśvatamस्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतं
और शाश्वत धाम तुम प्राप्त करोगे (sthānam + prāpsyasi + śāśvatam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Even here, in what functions as a rehearsal for the command still two verses away, Krishna doesn’t ask for a partial gesture — sarva-bhavena, “with all thy being.” The fullness usually associated only with verse 66’s climactic surrender is already present in the priming line; nothing about the total commitment demanded at the end was actually held back until then.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी बड़े निर्णय का केवल मन ही मन पूर्वाभ्यास कर रहे हों, तब भी उस पर दिखावे भर का नहीं, अपना पूरा ध्यान लगाएँ — वास्तविक क्षण में आपको जिस गुणवत्ता की प्रतिबद्धता चाहिए होगी, उसे पहले ही पूर्वाभ्यास से गढ़ना सार्थक है।

व्यावसायिक

  • जब आप किसी बड़ी पहल को पूरी तरह लागू करने से पहले उसका छोटा रूप आज़माकर देखें, तो उस प्रयोग को खानापूर्ति की तरह नहीं, वास्तविक और पूरे प्रयास से चलाएँ — पूर्ण शुरुआत के लिए जिस अनुशासन की आवश्यकता होगी, पूर्वाभ्यास भी उसी अनुशासन का हक़दार है।

परिवार और समाज

  • जब आप किसी कठिन बातचीत को उसके कुछ नरम रूप में छेड़कर माहौल भाँप रहे हों, तो उसमें भी वही पूरी ईमानदारी लाएँ जो आप असली बातचीत में लाते — अपनी सच्चाई को उस रूप के लिए बचाकर न रखें जिसे आपने 'असली' प्रयास मान रखा है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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