समझें
शिक्षाओं की तुलना
एक विचार, अध्यायों में उसका अनुसरण करते हुए — उसे गढ़ने वाले श्लोक, क्रम से, और हर श्लोक क्या जोड़ता है, इस पर एक पंक्ति।
काम, और उसकी कीमत
काम — चाहना
गीता किस तरह एक छोटी-सी चाह का पीछा करते हुए उसे एक अस्वतंत्र जीवन तक ले जाती हुई दिखाती है।
जिसे कर्म छू नहीं सकता
आत्मा — आत्म-तत्त्व
आपके उस अंश के श्लोक, जिस तक परिणाम कभी नहीं पहुँचते।
दबाव में स्थिरता
समत्व — समभाव
छह श्लोक उस साधी हुई शांति पर, जिसे गीता योग कहने को तैयार है।
अपना काम, भले ही ठीक से न हो
स्वधर्म
किसी और के सँवरे हुए कर्तव्य के बजाय अपने अपूर्ण कर्तव्य के पक्ष में गीता का तर्क।
इन्द्रियाँ और मन
इन्द्रिय · मनस् · बुद्धि
गीता का व्यावहारिक मॉडल, जो बताता है कि आत्म-संयम कठिन क्यों है और असली पकड़ कहाँ है।
जीवन को धारण करने के तीन ढंग
गुणत्रय
सत्त्व, रजस्, तमस् — गीता कर्म, ज्ञान और धृति को इस आधार पर बाँटती है कि उनमें कौन-सा गुण काम कर रहा है।