संस्कृत
अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम् । विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥ ५३ ॥
ahaṅkāraṃ balaṃ darpaṃ kāmaṃ krodhaṃ parigraham vimucya nirmamaḥ śānto brahma-bhūyāya kalpate
अनुवाद
अहंकार, बल-प्रयोग, दर्प, काम, क्रोध और परिग्रह को त्यागकर, ममता से रहित और शान्त मनुष्य ब्रह्म होने के योग्य हो जाता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 51 से शुरू हुआ क्रम यहाँ आकर पूरा होता है: अहंकार, हिंसा, घमंड, काम, क्रोध और परिग्रह को त्यागकर, ममता से रहित और शांत व्यक्ति “ब्रह्म होने के योग्य” (ब्रह्मभूयाय कल्पते) हो जाता है। क्रिया जान-बूझकर विनम्र रखी गई है — कल्पते, यानी “योग्य होता है”, न कि “हो जाता है”। यह तैयारी का वर्णन है, और ध्यान देने की बात है कि वास्तविक पहुँच अगले तीन श्लोकों में अंतिम मंज़िल नहीं, कुछ और ही निकलती है। यह वही सूची है जो गीता 16.18 में आसुरी गुणों का समूह थी — अहंकार, बल, घमंड, काम, क्रोध, परिग्रह — पर अब इसे त्याग दिया गया है। इससे मुक्त होकर, निर्मम और शान्त होकर, व्यक्ति “ब्रह्म होने के योग्य” हो जाता है (गीता 14.26)।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- ahaṅkāraṃ balaṃ darpaṃअहङ्कारं बलं दर्पं
- अहंकार, बल, दर्प (ahaṅkāram + balam + darpam)
- kāmaṃ krodhaṃ parigrahamकामं क्रोधं परिग्रहं
- काम, क्रोध, परिग्रह (kāmam + krodham + parigraham)
- vimucya nirmamaḥ śāntoविमुच्य निर्ममः शान्तो
- त्यागकर, ममता से रहित, शान्त (vimucya + nir-mamaḥ + śāntaḥ)
- brahma-bhūyāya kalpateब्रह्म-भूयाय कल्पते
- ब्रह्म बनने के योग्य होता है (brahma-bhūyāya + kalpate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The list moves in a particular order — ahankara and darpa (egoism, arrogance) are struck first, kama and krodha (desire and anger) next, parigraha (possessiveness, actual accumulation) last. The internal posture is asked to give way before the external grip on things does — you don’t wait to own less in order to want less; wanting less is what finally lets you hold less.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- अपने जीवन को सरल बनाने या चीज़ें छोड़ने से पहले देखें कि उस आसक्ति के पीछे काम कर रहे अहंकार और लालसा अब भी ज्यों के त्यों तो नहीं हैं — बाहरी सादगी शायद ही टिकती है, जब तक कि उसके पीछे की भीतरी चाह पहले ढीली न पड़ जाए।
व्यावसायिक
- किसी टीम को पुराने औज़ार, प्रक्रियाएँ या अपना दायरा छोड़ने का आदेश देने से पहले उन्हें थामे रहने से जुड़ी हैसियत की चिंता को सुलझाएँ — लोग नियंत्रण तभी छोड़ते हैं जब उस पकड़ के पीछे की असुरक्षा सचमुच कम हो चुकी हो।
परिवार और समाज
- परिवार के किसी सदस्य से किसी पुरानी शिकायत या ऐसी भूमिका को छोड़ने के लिए कहने से पहले, जिससे वह चिपका हुआ है, ध्यान दें कि किसी चीज़ को छोड़ना तभी संभव होता है जब वह भी छूट जाए जिसकी वह रक्षा कर रही थी — केवल दिखाई देने वाली आदत को नहीं, पहले उसके पीछे छिपे डर या अभिमान को सुलझाएँ।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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