18.24

संस्कृत

यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुनः । क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् ॥ २४ ॥

yat tu kāmepsunā karma sāhaṅkāreṇa vā punaḥ kriyate bahulāyāsaṃ tad rājasam udāhṛtam

अनुवाद

किन्तु जो कर्म कामनाओं की पूर्ति चाहने वाले व्यक्ति द्वारा, या फिर अहंकार के साथ और बहुत परिश्रम से किया जाता है, वह राजस कहा गया है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

राजसिक कर्म लालसा से, अहंकार से, या अत्यधिक तनाव के साथ किया जाता है। “बहुत प्रयास” वाला विवरण पहचान की एक उपयोगी कसौटी है। इससे संकेत मिलता है कि सात्त्विक कर्म सहज, या कम से कम तनाव-रहित, दिख सकता है, ठीक इसलिए कि वह श्रेय या परिणाम की अहंकार की माँग से जूझ नहीं रहा होता। अध्याय 3 में दिखावे के लिए किए गए राजसिक यज्ञ के वर्णन से इसकी तुलना करें: अपने ही इर्द-गिर्द घूमने वाला उद्देश्य और दिखाई देने वाला तनाव उन सभी गुण-आधारित क्रियाओं में बार-बार आते हैं जिनकी यह ग्रंथ जाँच करता है। राजसिक कर्म के दो चिह्न होते हैं: परिणाम के लिए काम और अहंकार, यानी “मैं यह कर रहा हूँ”। इसकी एक बनावट भी है: बहुल-आयास, यानी कठोर परिश्रम वाला और थका देने वाला। यहाँ प्रयास स्वयं को सिद्ध करने का प्रमाण बन जाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yat tu kāmepsunāयत् तु कामेप्सुना
परन्तु जो कर्म कामनाओं की इच्छा रखने वाले द्वारा (yat + tu + kāma-īpsunā)
karma sāhaṅkāreṇa vā punaḥकर्म साहङ्कारेण वा पुनः
अथवा फिर अहंकार के साथ (karma + sa-ahaṅkāreṇa + vā + punaḥ)
kriyate bahulāyāsaṃक्रियते बहुलायासं
बहुत परिश्रम से किया जाता है (kriyate + bahula-āyāsam)
tad rājasam udāhṛtamतद् राजसं उदाहृतं
वह राजस कहा गया है (tat + rājasam + udāhṛtam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

It’s easy to misread “much effort” as this chapter condemning hard work, when it’s flagging something narrower: strain as a symptom of how much the ego has staked on being seen to work hard, not a measure of how difficult the task objectively is. Two people can do the same demanding task; the sattvic one who does it because it’s needed will look different from the rajasic one who’s straining partly for the audience, even if the actual output looks identical.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप देखें कि आप किसी काम में दिखाई देने वाला ज़ोर लगा रहे हैं, तो जाँचिए कि क्या उस काम को सचमुच उतने परिश्रम की ज़रूरत है, या आपके भीतर का कोई हिस्सा चाहता है कि यह ज़ोर दूसरों को दिखे और उसका श्रेय मिले। अहंकार की कीमत कठिन काम करने में नहीं, बल्कि कठिनाई का प्रदर्शन करने में है — आप कठिन काम कर सकते हैं, बिना इसकी ज़रूरत महसूस किए कि कोई देखे कि वह कितना कठिन था।

व्यावसायिक

  • ऐसे परिश्रम पर नज़र रखें जो ज़रूरत के कारण नहीं, बल्कि दिखाने के लिए किया जा रहा हो — देर तक काम करते हुए दिखना, तनाव को ज़ाहिर करना — अपने में भी और अपनी टीम में भी। समस्या काम के बोझ में नहीं है; समस्या तब है जब ज़ोर किसी दर्शक की ओर भेजा गया संकेत बन जाए, न कि उस चीज़ का स्वाभाविक परिणाम जिसकी काम को सचमुच ज़रूरत थी।

परिवार और समाज

  • यदि आप पाएँ कि आप ज़ोर से आहें भर रहे हैं या बता रहे हैं कि किसी घरेलू काम ने आपको कितना थका दिया, तो ध्यान दीजिए कि क्या यह उस काम की वास्तविक कठिनाई है, या अपने परिश्रम को दिखाने और उसका श्रेय पाने की कोशिश। योगदान को सच्चा होने के लिए यह ज़रूरी नहीं कि उसका ज़ोर सबको दिखाई दे।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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