18.13

संस्कृत

पञ्चैतानि महाबाहो कारणानि निबोध मे । साङ्ख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि सिद्धये सर्वकर्मणाम् ॥ १३ ॥

pañcaitāni mahābāho kāraṇāni nibodha me sāṅkhye kṛtānte proktāni siddhaye sarvakarmaṇām

अनुवाद

हे महाबाहु, सब कर्मों की सिद्धि के लिए सांख्य सिद्धान्त में बताए गए इन पाँच कारणों को मुझसे जानो।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

व्याख्या

कृष्ण नीतिशास्त्र से तत्त्वमीमांसा की ओर मुड़ते हैं और सांख्य के सृष्टि-विज्ञान का सहारा लेकर हर कर्म के पीछे के पाँच कारणों के नाम बताते हैं — इनका विवरण अगले दो श्लोकों में दिया गया है। अध्याय 2 की तरह इस दर्शन की ओर केवल संकेत करने के बजाय यहाँ उसका स्पष्ट नाम लिया गया है। इससे उस बात को आधार मिलता है जो आगे चलकर एक तर्क बनने वाली है: इस मान्यता के विरुद्ध तर्क कि ‘स्व’ जो कुछ भी करता है, उसका एकमात्र कर्ता वही है। श्लोक 13–15 हर कर्म के पीछे के पाँच कारण बताते हैं — इसीलिए “यह मैंने अकेले किया” कहना भूल है। यह गीता 3.27 में कहा गया अकर्तापन ही है, जिसे आध्यात्मिक दावे के रूप में नहीं बल्कि कारणों के विश्लेषण के रूप में रखा गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

pañcaitāni mahābāhoपञ्चैतानि महाबाहो
हे महाबाहु, ये पाँच (pañca + etāni + mahā-bāho)
kāraṇāni nibodha meकारणानि निबोध मे
कारणों को मुझसे जानो (kāraṇāni + nibodha + me)
sāṅkhye kṛtānte proktāniसाङ्ख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि
सांख्य सिद्धान्त में बताए गए (sāṅkhye + kṛta-ante + proktāni)
siddhaye sarvakarmaṇāmसिद्धये सर्वकर्मणां
सभी कर्मों की सिद्धि के लिए (siddhaye + sarva-karmaṇām)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

टीका

Site Commentary

Six verses after staking a claim as his own “certain and best belief,” Krishna here does the opposite move — he explicitly cites an outside system, Samkhya, as the source of what he’s about to say. The two rhetorical strategies, personal conviction and appeal to established tradition, sit back to back without any sense that citing tradition here is a demotion; Krishna reaches for whichever kind of authority actually fits the claim — ethical verdicts get his own voice, causal metaphysics gets the citation.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

इस श्लोक को अपनाएँ

पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप कोई बात कहें, तो ध्यान दें कि उसके लिए आपके अपने विश्वास की ज़रूरत है या किसी मान्य स्रोत का हवाला देने की, और उसी के अनुसार सही रास्ता अपनाएँ। किसी नैतिक दृष्टिकोण को ऐसे रखना मानो उसे बाहरी पुष्टि चाहिए, उसे कमज़ोर करता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी तथ्यात्मक बात को केवल निजी राय की तरह प्रस्तुत करना।

व्यावसायिक

  • जब आप कोई सिफ़ारिश प्रस्तुत करें, तो उसे दो भागों में बाँटें: मूल्यों पर आधारित निर्णय को अपनी आवाज़ में और पूरे विश्वास के साथ कहें, और तथ्यात्मक या तकनीकी बातों को उनके पीछे के मान्य ढाँचे या आँकड़ों से पुष्ट करें। दोनों को मिला देने से दोनों पर से भरोसा उठने लगता है।

परिवार और समाज

  • अपने बच्चों को कोई निर्णय समझाते समय, 'मुझे पूरा विश्वास है कि यही सही निर्णय है' और 'यह रहा वास्तविक कारण जिससे यह सच है' के बीच स्पष्ट अंतर करें। उन्हें निजी विश्वास और बाहरी तथ्य को अलग-अलग पहचानना सिखाना एक सच्चा कौशल है, जो जीवन के दूसरे क्षेत्रों में भी काम आता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

स्वयं से पूछें

इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।

इस श्लोक पर चिंतन करें

    ← 18.12अध्याय 18 · 78 में से 1318.14 →