संस्कृत
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम् । मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते ॥ २५ ॥
anubandhaṃ kṣayaṃ hiṃsām anapekṣya ca pauruṣam mohād ārabhyate karma yat tat tāmasam ucyate
अनुवाद
जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और अपने सामर्थ्य का विचार किए बिना मोहवश आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहलाता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
तामसिक कर्म निरे मोह से आरम्भ किया जाता है, जिसमें न अपनी वास्तविक सामर्थ्य का कोई विचार होता है, न उससे दूसरों को होने वाली हानि और क्षति का। तीनों प्रकार की चूकों में इसके परिणाम सबसे गंभीर होते हैं, और ठीक इसलिए कि इसका असर बाहर की ओर होता है — जहाँ राजसिक कर्म की कीमत मुख्यतः कर्ता स्वयं चुकाता है, वहीं तामसिक कर्म केवल असावधानी के कारण नुकसान दूसरों पर डाल देता है। तामसिक कर्म उन सब बातों की अनदेखी करता है जिन्हें किसी निर्णय में तौलना चाहिए — अनुबन्ध (आगे क्या होगा), क्षय (कीमत), हिंसा (हानि), पौरुष (क्या कोई ऐसा कर भी सकता है) — और मोहात्, यानी धुंध में से, आगे बढ़ता है। असावधान कर्म का गुण।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- anubandhaṃ kṣayaṃ hiṃsāmअनुबन्धं क्षयं हिंसां
- परिणाम, हानि और हिंसा का (anubandham + kṣayam + hiṃsām)
- anapekṣya ca pauruṣamअनपेक्ष्य च पौरुषं
- और अपने सामर्थ्य का विचार किए बिना (anapekṣya + ca + pauruṣam)
- mohād ārabhyate karma yatमोहाद् आरभ्यते कर्म यत्
- जो कर्म मोह से आरम्भ किया जाता है (mohāt + ārabhyate + karma + yat)
- tat tāmasam ucyateतत् तामसं उच्यते
- वह तामस कहलाता है (tat + tāmasam + ucyate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Notice the pairing: disregard for one’s own actual capacity sits in the same clause as disregard for the injury caused to others, as if these were the same failure rather than two. That’s a sharp diagnostic — someone who has lost track of what they’re actually capable of is exactly the person most likely to cause damage they didn’t see coming; miscalibrated self-assessment and harm to others aren’t separate risks here, they’re cause and effect.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- कोई बड़ी ज़िम्मेदारी लेने से पहले अपनी वास्तविक क्षमता के बारे में ईमानदार रहें, उस क्षमता के बारे में नहीं जो आप चाहते हैं कि आपमें होती। आत्म-भ्रम से उपजा अति-उत्साह शायद ही कभी निजी रहता है — वह अक्सर उन लोगों पर वास्तविक नुकसान बनकर गिरता है जो इस भरोसे पर टिके हैं कि आप अपना वादा निभाएँगे।
व्यावसायिक
- अपनी टीम को किसी कठिन समय-सीमा के लिए वचनबद्ध करने से पहले, अपेक्षित क्षमता के बजाय वास्तविक क्षमता का ईमानदारी से आकलन करें। क्षमता से अधिक बोझ उठाने वाली टीम केवल अपने लिए ही जोखिम नहीं होती — यह ग़लत आकलन आम तौर पर आगे चलकर दूसरी टीमों या ग्राहकों को वास्तविक अप्रत्यक्ष नुकसान पहुँचाता है।
परिवार और समाज
- ऐसी पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ ओढ़ लेने से पहले जिन्हें आप वास्तव में निभा नहीं सकते, अपनी असली क्षमता के बारे में ईमानदार रहें — अपनी सीमा से अधिक खिंचना केवल आपकी निजी क़ीमत नहीं है, यह आम तौर पर उन लोगों के लिए निराशा बनकर सामने आता है जो आप पर भरोसा किए बैठे थे।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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