18.7

संस्कृत

नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते । मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ॥ ७ ॥

niyatasya tu saṃnyāsaḥ karmaṇo nopapadyate mohāt tasya parityāgas tāmasaḥ parikīrtitaḥ

अनुवाद

किन्तु नियत कर्म का संन्यास उचित नहीं है। मोहवश उसका त्याग तामस कहा गया है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

त्याग के त्रिविध विश्लेषण की शुरुआत उसके सबसे निकृष्ट रूप से होती है: भ्रम या मोह के कारण किसी नियत कर्तव्य को छोड़ देना तामसिक त्याग है, और कृष्ण इसे दो टूक शब्दों में अनुचित कहते हैं। यह अध्याय 3 की उस चेतावनी की प्रतिध्वनि है जो गलत समझ के कारण अपने नियत कर्म को छोड़ने के विरुद्ध दी गई थी, और यह ज्ञान के रूप में किए गए त्याग तथा ज्ञान का वेश ओढ़कर किए गए पलायन रूपी त्याग के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचता है। तामसिक त्याग: अपने नियत कर्म को मोहात्, अर्थात् भ्रम के कारण, छोड़ देना — जो ठीक वही है जिसका प्रस्ताव अर्जुन ने अध्याय 1 में रखा था और जिसे गीता 18.59–गीता 18.60 व्यर्थ बताएँगे।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

niyatasya tu saṃnyāsaḥनियतस्य तु संन्यासः
किन्तु नियत कर्म का संन्यास (niyatasya + tu + saṃnyāsaḥ)
karmaṇo nopapadyateकर्मणो नोपपद्यते
उचित नहीं है (karmaṇaḥ + na + upapadyate)
mohāt tasya parityāgasमोहात् तस्य परित्यागस्
मोहवश उसका त्याग (mohāt + tasya + parityāgaḥ)
tāmasaḥ parikīrtitaḥतामसः परिकीर्तितः
तामस कहा गया है (tāmasaḥ + parikīrtitaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna opens the threefold breakdown with the worst case, not the ideal — tamasic relinquishment described first, sattvic relinquishment held back until verse 9. Naming the failure mode before naming the goal is a real teaching choice: by the time verse 9 arrives, “do your duty because it ought to be done” lands as a relief and a contrast, not as an abstract ideal introduced cold.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जिस आदत को आप सच में अपनाना चाहते हैं, उसका वर्णन करने से पहले उसके विफल रूप को ठीक-ठीक पहचानें — इस श्लोक के शब्दों में, स्पष्टता से नहीं बल्कि भ्रम से छोड़ देना — ताकि जब आप आदर्श का नाम लें, तो वह एक अस्पष्ट, अलग-थलग लक्ष्य की तरह नहीं, बल्कि इस अंतर के सहारे मन में उतरे।

व्यावसायिक

  • किसी नए व्यक्ति को काम सिखाते समय आदर्श तरीका बताने से पहले उसे विफलता का ढर्रा दिखाएँ — किसी सोचे-समझे निर्णय के कारण नहीं, बल्कि काम का दायरा स्पष्ट न होने के कारण उसे छोड़ देना; यह अंतर अकेले सर्वोत्तम तरीके के वर्णन की तुलना में मानक को अधिक जल्दी सिखा देता है।

परिवार और समाज

  • किसी बच्चे को काम पूरा करने जैसा कोई मूल्य सिखाते समय आदर्श का वर्णन करने से पहले ठोस रूप से बताएँ कि उलझन के कारण हार मान लेना कैसा दिखता है — बच्चों को कोई ठोस तुलना आम तौर पर लक्ष्य के केवल अमूर्त वर्णन से बेहतर समझ आती है।

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