संस्कृत
अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः । ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः ॥ ७० ॥
adhyeṣyate ca ya imaṃ dharmyaṃ saṃvādam āvayoḥ jñāna-yajñena tenāham iṣṭaḥ syām iti me matiḥ
अनुवाद
और जो कोई हम दोनों के इस धर्ममय संवाद का अध्ययन करेगा, उसके द्वारा मैं ज्ञान-यज्ञ से पूजित होऊँगा — ऐसा मेरा मत है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
इस संवाद का केवल अध्ययन करना भी उपासना माना जाता है, “ज्ञान का यज्ञ” (ज्ञान-यज्ञ) — बौद्धिक जुड़ाव को यज्ञ के रूप में देखने की वही नई दृष्टि, जो अध्याय 4 ने तब प्रस्तुत की थी जब उसने ज्ञान के यज्ञ को द्रव्य के यज्ञ से श्रेष्ठ ठहराया था। यहाँ कृष्ण केवल पूर्ण समर्पण को ही पुरस्कृत नहीं कर रहे; वे कई पायदानों वाली एक सीढ़ी बना रहे हैं, जिसके अलग-अलग पायदानों तक उपदेश से जुड़ाव के अलग-अलग स्तर सचमुच पहुँच सकते हैं। संवाद का अध्ययन करना भी एक ज्ञान-यज्ञ है, अर्थात् ज्ञान का यज्ञ (गीता 4.33) — और कृष्ण कहते हैं कि इससे “मेरी उपासना होती है।” गीता को पढ़ना अपने आप में एक अर्पण है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- adhyeṣyate ca ya imaṃअध्येष्यते च य इमं
- और जो इसका अध्ययन करेगा (adhyeṣyate + ca + yaḥ + imam)
- dharmyaṃ saṃvādam āvayoḥधर्ंयं संवादं आवयोः
- हम दोनों के धर्ममय संवाद का (dharmyam + saṃvādam + āvayoḥ)
- jñāna-yajñena tenāhamज्ञान-यज्ञेन तेनाहं
- उसके द्वारा, ज्ञानयज्ञ से मैं (jñāna-yajñena + tena + aham)
- iṣṭaḥ syām iti me matiḥइष्टः स्यां इति मे मतिः
- पूजित होऊँगा — ऐसा मेरा मत है (iṣṭaḥ + syām + iti + me + matiḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
“Such is my mind” — iti me matiḥ — is an odd hedge to attach to a claim about cosmic worship. Krishna doesn’t say this is simply how reality works, he frames it as his own judgment, offered rather than decreed. Even Krishna, delivering what should be the most authoritative possible claim, chooses to mark it as a considered opinion rather than an unqualified fact.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप कोई ऐसी बात कहते हैं जिस पर आपको सचमुच भरोसा है, तब भी उसे सीधे तथ्य की तरह कहने के बजाय अपनी सोची-समझी राय के रूप में रखना मददगार हो सकता है — दृढ़ विश्वास और अपनी निश्चितता को लेकर विनम्रता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, और दोनों एक ही वाक्य में एक साथ सच हो सकते हैं।
व्यावसायिक
- जब आप नेतृत्व के सामने कोई दृढ़ सिफ़ारिश रखते हैं, तो उसे बिना किसी शर्त के तथ्य की तरह कहने के बजाय 'यह मेरा आकलन है' के रूप में रखने से अक्सर वही दृढ़ विश्वास दूसरों के लिए ऐसा रूप ले लेता है जिस पर वे वास्तव में विचार कर सकें, न कि बस उसे मान लें या उसका विरोध करें।
परिवार और समाज
- जब आप किसी करीबी व्यक्ति के साथ कोई दृढ़ राय साझा करते हैं, तो उसे सीधे तथ्य की तरह कहने के बजाय 'मैं इसे ऐसे देखता हूँ' कहने से उनके दृष्टिकोण के लिए रास्ता खुला रहता है — दृढ़ विश्वास के लिए यह निश्चित होना ज़रूरी नहीं कि केवल आपकी राय ही सही है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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