18.69

संस्कृत

न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः । भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि ॥ ६९ ॥

na ca tasmān manuṣyeṣu kaścin me priya-kṛttamaḥ bhavitā na ca me tasmād anyaḥ priyataro bhuvi

अनुवाद

मनुष्यों में उससे बढ़कर मेरा प्रिय कार्य करने वाला कोई नहीं है, और पृथ्वी पर उससे बढ़कर मुझे प्रिय कोई दूसरा होगा भी नहीं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

ज़ोर देने के लिए अतिशयोक्ति: जो इस उपदेश को आगे ले जाता है, उससे बढ़कर प्रिय सेवा कोई नहीं करता, और उससे अधिक प्रिय कभी कोई नहीं होगा। श्लोक 67-71 में यह क्रमिक चढ़ाव सोच-समझकर रखा गया है — पहले प्रतिबंध, फिर उपदेश आगे पहुँचाने का फल, और अब सर्वोच्च प्रशंसा — जो उस क्रमबद्ध आश्वासन की ओर बढ़ता है जिसे अगले दो श्लोक पूरा करते हैं। प्रियकृत्तम — “सबसे प्रिय सेवा करने वाला।” जो ग्रहणशील लोगों को गीता सिखाता है, उसे सबमें सबसे प्रिय कहा गया है — यह इस अध्याय के “मुझे प्रिय” वाले क्रमशः बढ़ते कथनों में सबसे प्रबल है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

na ca tasmān manuṣyeṣu kaścinन च तस्मान् मनुष्येषु कश्चिन्
और मनुष्यों में उसकी अपेक्षा कोई भी नहीं (na + ca + tasmāt + manuṣyeṣu + kaścit)
me priya-kṛttamaḥ bhavitāमे प्रिय-कृत्तमः भविता
मेरी अधिक प्रिय सेवा करने वाला होगा (me + priya-kṛt-tamaḥ + bhavitā)
na ca me tasmādन च मे तस्माद्
और न उसकी अपेक्षा मेरा (na + ca + me + tasmāt)
anyaḥ priyataro bhuviअन्यः प्रियतरो भुवि
पृथ्वी पर कोई दूसरा अधिक प्रिय (anyaḥ + priya-taraḥ + bhuvi)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The claim covers two tenses in one breath — no one now, and no one ever hereafter — an oddly totalizing form for what is really praise of a category of action, not of one irreplaceable person. The hyperbole isn’t really about ranking individuals; it’s underscoring how much weight the text places on the single act of carrying the teaching forward, regardless of who does it.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आपको इस बात से नाराज़गी हो कि आपने कभी जो अच्छी चीज़ बनाई थी, उसका श्रेय अब वैसा ही काम करने वाले किसी और को मिल गया, तो याद रखें कि कुछ कर्म — मार्गदर्शन करना, सिखाना, किसी चीज़ को आगे ले जाना — इसलिए मूल्यवान माने जाते हैं कि वे किस तरह के काम हैं, इसलिए नहीं कि वे केवल आपके हैं और उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।

व्यावसायिक

  • जब आप किसी को किसी पद्धति का अच्छी तरह प्रचार करने के लिए पुरस्कृत करें, तो याद रखें कि यह प्रशंसा वास्तव में उस तरह के व्यवहार की है — जो भी इसे उतनी ही अच्छी तरह करे, वह उतनी ही मान्यता का हक़दार है, केवल वह पहला व्यक्ति नहीं जिसने संयोग से इसे सबसे पहले किया।

परिवार और समाज

  • जब आप परिवार के किसी सदस्य की किसी परम्परा या मूल्य को आगे ले जाने के लिए बढ़-चढ़कर प्रशंसा करें, तो याद रखें कि आप वास्तव में उस कर्म का ही सम्मान कर रहे हैं — जो भी उसे उतनी ही लगन से अपनाए, वह भी उतनी ही प्रशंसा का हक़दार होगा, केवल वही नहीं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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