18.76

संस्कृत

राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम् । केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः ॥ ७६ ॥

rājan saṃsmṛtya saṃsmṛtya saṃvādam imam adbhutam keśavārjunayoḥ puṇyaṃ hṛṣyāmi ca muhur muhuḥ

अनुवाद

हे राजन्, केशव और अर्जुन के इस अद्भुत और पवित्र संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

संजय की अपनी भक्तिपूर्ण प्रतिक्रिया, जो अब धृतराष्ट्र को संबोधित है: केशव और अर्जुन के इस अद्भुत संवाद को बार-बार स्मरण करते हुए वे बार-बार हर्षित होते हैं। दोहराई गई क्रिया, संस्मृत्य संस्मृत्य, अपने व्याकरण में ही स्मरण की उसी पुनरावृत्ति को साकार करती है जिसका वह वर्णन करती है। संस्मृत्य संस्मृत्य — “स्मरण करते हुए, स्मरण करते हुए।” संजय उस अभ्यास का आदर्श प्रस्तुत करते हैं जिसकी गीता अपने पाठक से अपेक्षा करती है: एक बार का श्रवण नहीं, बल्कि स्मरण किए गए संवाद की ओर बार-बार लौटना।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

rājan saṃsmṛtya saṃsmṛtyaराजन् संस्मृत्य संस्मृत्य
हे राजन्, बार-बार स्मरण करके (rājan + saṃsmṛtya + saṃsmṛtya)
saṃvādam imam adbhutamसंवादं इमं अद्भुतं
इस अद्भुत संवाद को (saṃvādam + imam + adbhutam)
keśavārjunayoḥ puṇyaṃकेशवार्जुनयोः पुण्यं
केशव और अर्जुन के पवित्र (keśava-arjunayoḥ + puṇyam)
hṛṣyāmi ca muhur muhuḥहृष्यामि च मुहुः मुहुः
और मैं बार-बार हर्षित होता हूँ (hṛṣyāmi + ca + muhuḥ + muhuḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Sanjaya addresses this rapture to Dhritarashtra — the blind king whose sons are the ones about to lose the war this dialogue precedes. It’s a strange audience for unrestrained joy, and the text doesn’t pause to flag the mismatch; the wonder of the teaching, apparently, operates on its own track, indifferent to whether its immediate listener has any reason to share in it.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आप किसी सच्ची और सुंदर चीज़ पर सच्चा विस्मय अनुभव कर सकते हैं, तब भी जब आप उसे किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बाँट रहे हों जिसके लिए यह समाचार वास्तव में कठिन है — उस अंतर्दृष्टि का मूल्य किसी ऐसे श्रोता की प्रतीक्षा नहीं करता जिसकी परिस्थितियाँ उसका उत्सव मनाना सहज बना दें।

व्यावसायिक

  • जब आप किसी कठिनाई से मिली अंतर्दृष्टि या सफलता को लेकर सचमुच उत्साहित हों, तो ध्यान रखें कि जिस व्यक्ति को आप यह बता रहे हैं, वह आपसे बहुत अलग स्थिति में हो सकता है — सच्चा उत्साह और श्रोता की बेमेल परिस्थितियाँ एक साथ रह सकती हैं, पर इसे अनदेखा करने के बजाय इस पर ध्यान देना उचित है।

परिवार और समाज

  • जिस चीज़ से आपको सच्चा आनंद मिला, उसे परिवार के किसी ऐसे सदस्य के साथ बाँटना जो इस समय किसी कठिन दौर से गुज़र रहा है, अपने-आप गलत नहीं है — पर यह मान लेने के बजाय कि वह भी वही अनुभव करेगा जो आप करते हैं — केवल इसलिए कि आप ऐसा अनुभव करते हैं — इस बेमेलपन पर ध्यान दें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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