संस्कृत
ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना । करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसङ्ग्रहः ॥ १८ ॥
jñānaṃ jñeyaṃ parijñātā trividhā karmacodanā karaṇaṃ karma karteti trividhaḥ karmasaṅgrahaḥ
अनुवाद
ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता — ये कर्म की तीन प्रकार की प्रेरणा हैं; करण, कर्म और कर्ता — ये कर्म के तीन प्रकार के घटक हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह एक संक्रमण का श्लोक है, जो ढाँचे को नए सिरे से स्थापित करता है: तीन चीज़ें कर्म को प्रेरित करती हैं (ज्ञान, ज्ञेय, ज्ञाता) और तीन चीज़ें उसे बनाती हैं (करण, कर्म, कर्ता)। कर्ता की भोली धारणा को अभी-अभी ध्वस्त करने के बाद, कृष्ण अब एक तकनीकी शब्दावली फिर से गढ़ते हैं, जिसे वे अगले बीस श्लोकों तक सत्त्व-रजस्-तमस् की छलनी से छानने वाले हैं — पहले ज्ञान, फिर कर्म, फिर कर्ता, फिर बुद्धि, फिर धृति, फिर सुख। आगे आने वाले त्रिकों का ढाँचा: कोई कर्म किससे प्रेरित होता है (ज्ञाता, ज्ञेय, ज्ञान) और वह किससे बनता है (कर्ता, करण, कर्म)। इसके बाद गीता 18.19–गीता 18.40 हर तत्त्व को गुण के रंग में रंगते हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- jñānaṃ jñeyaṃ parijñātāज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता
- ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता (jñānam + jñeyam + parijñātā)
- trividhā karmacodanāत्रिविधा कर्मचोदना
- कर्म की त्रिविध प्रेरणा है (trividhā + karma-codanā)
- karaṇaṃ karma kartetiकरणं कर्म कर्तेति
- करण, कर्म और कर्ता (karaṇam + karma + kartā + iti)
- trividhaḥ karmasaṅgrahaḥत्रिविधः कर्मसङ्ग्रहः
- कर्म का त्रिविध संग्रह है (trividhaḥ + karma-saṅgrahaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Two triads land back to back here — the drivers of action, and the parts that make it up — and the text is about to fracture each of six total terms into three guna variants, so by the end of this section a single verb like “to act” has produced eighteen distinct technical categories. Verse 18 is easy to skim past as filler between the ethics of tyaga and the guna analysis, but it’s actually the chapter’s table of contents, laid down before the content it indexes.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- अपने जीवन की किसी उलझी हुई चीज़ का विश्लेषण शुरू करने से पहले — कोई आदत, रिश्तों में बार-बार दोहराया जाने वाला कोई ढर्रा — पहले उन पहलुओं की रूपरेखा बना लें जिन्हें आप देखने वाले हैं, ठीक वैसे ही जैसे यह श्लोक किसी पर भी विचार करने से पहले छह शब्दों को सामने रख देता है। एक छोटी-सी विषय-सूची विश्लेषण को बिना दिशा के भटकते चक्कर में बदलने से रोकती है।
व्यावसायिक
- कोई विस्तृत ऑडिट या समीक्षा प्रस्तुत करने से पहले, जिन श्रेणियों को आप शामिल करने वाले हैं उन्हें शुरू में ही बता दें, एक विषय-सूची की तरह, ताकि किसी भी विशिष्ट निर्णय से पहले दायरे की रूपरेखा सामने आ जाए। इससे लोगों को यह नहीं लगता कि समीक्षा जिस निष्कर्ष पर पहुँची, उसने उन्हें अचानक घेर लिया।
परिवार और समाज
- परिवार की किसी ऐसी बातचीत से पहले जिसमें कई संवेदनशील विषय उठने वाले हों, पहले उन विषयों का नाम ले लें जिन पर आप बात करना चाहते हैं, ताकि बीच बातचीत में किसी को ऐसे दायरे से झटका न लगे जिसके लिए वह तैयार नहीं था।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।