18.67

संस्कृत

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन । न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥ ६७ ॥

idaṃ te nātapaskāya nābhaktāya kadācana na cāśuśrūṣave vācyaṃ na ca māṃ yo'bhyasūyati

अनुवाद

यह उपदेश तुम्हें कभी भी ऐसे व्यक्ति से नहीं कहना चाहिए जो तपरहित हो, न ही भक्तिहीन से, न सुनने की इच्छा न रखने वाले से, और न ही उससे जो मुझमें दोष देखता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

सर्वोच्च उपदेश के ठीक बाद एक प्रतिबंध आता है: यह उपदेश कभी उससे न कहें जो तप या भक्ति से रहित हो, सुनना न चाहता हो, या कृष्ण के प्रति द्वेष रखता हो। यह ज्ञान-साहित्य के सबसे पुराने अर्थ में द्वार पर पहरा बिठाने वाला नियम है — ग्रंथ ज़ोर देकर कहता है कि कुछ उपदेश यदि ऐसे व्यक्ति को सौंप दिए जाएँ जो उन्हें ग्रहण करने के लिए तैयार नहीं है, तो वे सचमुच हानि करते हैं। साथ ही वह पात्रता को पद-प्रतिष्ठा के बजाय मनोवृत्ति के आधार पर बताता है, जो उस जन्म-आधारित वर्गीकरण से बिलकुल अलग है जिससे इस अध्याय का आरंभ हुआ था। यह उपदेश सबके लिए नहीं है — इसके लिए तपस् (कुछ अनुशासन), भक्ति (कुछ प्रेम) और शुश्रूषा (सुनने की इच्छा) की उपस्थिति तथा अभ्यसूया (तिरस्कार) का अभाव आवश्यक है। ये वही प्रवेश की शर्तें हैं जो गीता 4.39 में हैं: इनके बिना उपदेश मन में नहीं उतरता।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

idaṃ te nātapaskāyaइदं ते नातपस्काय
यह तुम्हारा उपदेश, तपरहित व्यक्ति को नहीं (idam + te + na + a-tapaskāya)
nābhaktāya kadācanaनाभक्ताय कदाचन
न भक्तिरहित व्यक्ति को, कभी भी (na + a-bhaktāya + kadācana)
na cāśuśrūṣave vācyaṃन चाशुश्रूषवे वाच्यं
और न सुनने की इच्छा न रखने वाले को — कहना चाहिए (na + ca + a-śuśrūṣave + vācyam)
na ca māṃ yo'bhyasūyatiन च मां योऽभ्यसूयति
और न उसको, जो मुझमें दोष देखता है (na + ca + mām + yaḥ + abhyasūyati)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The four disqualifications aren’t identical in kind: lacking austerity or devotion is simply being unready, unwillingness to listen is passive resistance, and open hostility is active opposition. The restriction reads as a gradient of closedness rather than a single flat gate — the text discriminates between someone who isn’t ready yet and someone who has actively closed the door, and treats them differently in how much caution each warrants.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • कोई ऐसी बात साझा करने से पहले, जिसे आपने बड़ी मेहनत से पाया है और जिसकी आपको परवाह है, देखें कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में कहाँ खड़ा है — केवल तैयार न होना और सक्रिय रूप से विरोधी होना अलग-अलग बातें हैं, और दूसरी स्थिति में सच्चे संयम की ज़रूरत होती है, जो पहली में नहीं होती।

व्यावसायिक

  • किसी विवादास्पद सिफ़ारिश को किसी हितधारक पर थोपने से पहले, जो व्यक्ति केवल संदर्भ से अपरिचित है और जो सक्रिय रूप से विरोध में है, उनमें अंतर करें — पहला धैर्यपूर्वक समझाए जाने का अधिकारी है, जबकि दूसरे के मामले में आपको तब तक रुके रहना चाहिए जब तक स्वयं उस विरोध का समाधान न हो जाए।

परिवार और समाज

  • परिवार के किसी सदस्य के सामने कोई संवेदनशील बात उठाने का निर्णय लेते समय, जो व्यक्ति अभी उसे सुनने के लिए बस तैयार नहीं है और जिसने साफ़ कर दिया है कि वह उसे सुनना नहीं चाहता, उनमें अंतर पहचानें — दूसरे के साथ पहले की तुलना में अधिक संयम बरतना चाहिए।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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