संस्कृत
विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानसः । ध्यानयोगपरो नित्यं वैराग्यं समुपाश्रितः ॥ ५२ ॥
vivikta-sevī laghv-āśī yata-vāk-kāya-mānasaḥ dhyāna-yoga-paro nityaṃ vairāgyaṃ samupāśritaḥ
अनुवाद
जो एकान्त में रहता है, थोड़ा भोजन करता है, जिसने अपनी वाणी, शरीर और मन को संयम में रखा है, जो सदा ध्यानयोग में लगा रहता है और जिसने वैराग्य का दृढ़ आश्रय ले लिया है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
वर्णन अब आंतरिक भाव से हटकर देह द्वारा किए जाने वाले अभ्यास की ओर मुड़ता है: एकांत, अल्प आहार, वाणी, शरीर और मन का संयम, निरंतर ध्यान, और वैराग्य की शरण। यह कोई नई शिक्षा नहीं, बल्कि अध्याय 6 के ध्यान-संबंधी निर्देशों का संक्षिप्त पुनर्कथन है, जिसे यहाँ अपने आप में एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि ब्रह्म-प्राप्ति की ओर ले जाने वाली एक लंबी शृंखला की एक कड़ी के रूप में रखा गया है। बाहरी परिस्थितियाँ गीता 6.10–गीता 6.17 से: विविक्तसेवी (एकांत में रहने वाला), लघ्वाशी (अल्प आहार करने वाला), ध्यानयोगपर (स्थिर ध्यान में लगा), वैराग्य (अनासक्ति)। अभ्यास पर एक बार और दृष्टि।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- vivikta-sevī laghv-āśīविविक्त-सेवी लघ्व्-आशी
- एकान्त का सेवन करने वाला, अल्प आहार करने वाला (vivikta-sevī + laghu-āśī)
- yata-vāk-kāya-mānasaḥयत-वाक्-काय-मानसः
- वाणी, शरीर और मन को वश में रखने वाला (yata-vāk-kāya-mānasaḥ)
- dhyāna-yoga-paro nityaṃध्यान-योग-परो नित्यं
- सदा ध्यानयोग में तत्पर (dhyāna-yoga-paraḥ + nityam)
- vairāgyaṃ samupāśritaḥवैराग्यं समुपाश्रितः
- वैराग्य का भली-भाँति आश्रय लिए हुए (vairāgyam + samupāśritaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Where the previous verse listed internal conditions, purified reason, dropped attachment, this one lists external ones: where you live, how much you eat, how tightly you hold speech and body. Neither list is presented as sufficient alone. The inward work of verse 51 evidently needs the outward scaffolding this verse adds, solitude, restraint, a controlled environment, to actually hold rather than dissolve under ordinary conditions.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- कोई आंतरिक संकल्प, चाहे एकाग्रता का हो, शांति का हो या किसी नई आदत का, उसके अनुरूप बाहरी ढाँचे के बिना शायद ही टिक पाता है: आपका परिवेश, आपकी दिनचर्या, और वह सब जिसे आप अपने पास आने देते हैं। केवल दृढ़ निश्चय ही नहीं, बाहरी परिस्थितियाँ भी बनाइए।
व्यावसायिक
- गहन काम या गुणवत्ता के प्रति किसी टीम की घोषित आंतरिक प्रतिबद्धता, उसके अनुरूप बाहरी ढाँचे के बिना नहीं टिकती: सुरक्षित रखा गया समय, कम व्यवधान, समीक्षा की एक नियंत्रित प्रक्रिया। अनुशासन की माँग तभी करें जब उसे सहारा देने वाला परिवेश भी बनाएँ।
परिवार और समाज
- अपने परिवार के साथ अधिक उपस्थित रहने की इच्छा एक आंतरिक इरादा है, जिसे सचमुच टिकाने के लिए एक बाहरी ढाँचे की ज़रूरत होती है: दूसरे कमरे में रखा फ़ोन, एक तय समय, एक निश्चित जगह — जो काम परिवेश में बदलाव आपके लिए कर सकता है, उसके लिए केवल इच्छाशक्ति पर निर्भर न रहें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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