संस्कृत
पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान् । वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम् ॥ २१ ॥
pṛthaktvena tu yajjñānaṃ nānābhāvān pṛthagvidhān vetti sarveṣu bhūteṣu tajjñānaṃ viddhi rājasam
अनुवाद
किन्तु जो ज्ञान सभी प्राणियों में अनेक प्रकार के भिन्न-भिन्न भावों को अलग-अलग करके जानता है, उस ज्ञान को तुम राजस जानो।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
इसके विपरीत, राजसिक ज्ञान सभी प्राणियों में अनेक अलग-अलग अस्तित्वों को उनकी वास्तविक भिन्नता में देखता है — यह ठीक-ठीक ग़लत नहीं, पर अधूरा है: जहाँ सात्त्विक ज्ञान सबके मूल में स्थित एक को देखता है, वहाँ यह अनेक को देखता है। यह एक दुर्लभ क्षण है जहाँ बीच का गुण किसी स्पष्ट दोष के बजाय कुछ ऐसा उत्पन्न करता है जो सामान्य, सक्षम बोध जैसा दिखता है — और यही एक कारण है कि इस पूरे ग्रंथ में रजस् वह गुण है जिसे अपने भीतर पकड़ना सबसे कठिन है। राजसिक ज्ञान अनेकता पर रुक जाता है — वास्तविक, उपयोगी, पर अधूरा। यह भिन्नताओं को देखता है और उनमें से होकर बहती उस एक सत्ता को चूक जाता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- pṛthaktvena tu yajjñānaṃपृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं
- परन्तु जो ज्ञान पृथक्ता से (pṛthaktvena + tu + yat-jñānam)
- nānābhāvān pṛthagvidhānनानाभावान् पृथग्विधान्
- नाना प्रकार के अलग-अलग भावों को (nānā-bhāvān + pṛthak-vidhān)
- vetti sarveṣu bhūteṣuवेत्ति सर्वेषु भूतेषु
- सब प्राणियों में जानता है (vetti + sarveṣu + bhūteṣu)
- tajjñānaṃ viddhi rājasamतज्ज्ञानं विद्धि राजसं
- उस ज्ञान को राजस जानो (tat-jñānam + viddhi + rājasam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Of the three types of knowledge, this is the only one Krishna doesn’t accuse of any error — sattvic knowledge sees a truth, tamasic knowledge grasps a falsehood, but rajasic knowledge accurately perceives beings as genuinely distinct, which is also just how the empirical world presents itself to anyone paying ordinary attention. That’s precisely what makes it the tier most likely to be mistaken for the whole of wisdom: a person can be entirely correct about what they’re seeing and still, by this ranking, be only halfway there.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- संसार आपके सामने जिस रूप में आता है, उसके बारे में तथ्य के स्तर पर सही होने का अर्थ यह नहीं कि आप उपलब्ध सबसे गहरी समझ तक पहुँच गए हैं। जब आपकी वर्तमान दृष्टि में वास्तव में कुछ भी गलत न हो, तब भी एक और गहरे स्तर के लिए खुले रहें।
व्यावसायिक
- अपनी प्रणालियों को सचमुच अलग-अलग घटकों के रूप में देखने वाली तकनीकी रूप से सटीक और आँकड़ों पर आधारित समझ भी उन्हें आपस में जोड़ने वाले किसी गहरे, एकीकृत करने वाले पैटर्न को देखने से चूक सकती है। हिस्सों के बारे में सही होने को पूरे को समझ लेना न मान बैठें — सबसे खतरनाक अंधे बिंदु वे होते हैं जो सटीक तो होते हैं, पर अधूरे।
परिवार और समाज
- परिवार के हर सदस्य की ज़रूरतों को सचमुच अलग और भिन्न देखना सही है, पर इस सटीकता को पूरी तस्वीर न मान बैठें — पूरे परिवार के आपसी व्यवहार के नीचे अक्सर एक गहरा, साझा पैटर्न चलता रहता है, जिसे केवल हर व्यक्ति के स्तर की सटीकता आपको नहीं दिखाएगी।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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