संस्कृत
तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः । पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः ॥ १६ ॥
tatraivaṃ sati kartāram ātmānaṃ kevalaṃ tu yaḥ paśyaty akṛtabuddhitvān na sa paśyati durmatiḥ
अनुवाद
ऐसा होने पर भी जो व्यक्ति अपनी अपरिपक्व बुद्धि के कारण केवल आत्मा को ही कर्ता मानता है, वह दुर्बुद्धि वास्तव में नहीं देखता।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
चूँकि पाँच कारक हमेशा काम करते रहते हैं, इसलिए जो कोई पृथक, एकरूप आत्मा को ही एकमात्र कर्ता मानता है, वह कृष्ण के शब्दों में “दुर्बुद्धि” है — वह वास्तव में स्पष्ट नहीं देखता। यह इस अध्याय में उस भेद का सबसे तीखा कथन है जिसे अध्याय 13 ने पहली बार खींचा था: एक ओर क्षेत्र, जहाँ यह सारा कारण-तंत्र काम करता है, और दूसरी ओर क्षेत्र को जानने वाला, अर्थात सच्ची आत्मा, जिसके बारे में यहाँ सांख्य का ढाँचा यह संकेत करता है कि वह वास्तव में कभी “कर्म” करता ही नहीं।
आत्मा को कर्ता, अर्थात करने वाला, मानना ही भूल है — आत्मा अकर्ता है (गीता 13.29)। जो व्यक्ति सोचता है कि वह कर्म करता है, उसकी अकृत-बुद्धि है, यानी अधूरी समझ।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- tatraivaṃ satiतत्रैवं सति
- ऐसी स्थिति में (tatra + evam + sati)
- kartāram ātmānaṃ kevalaṃ tu yaḥकर्तारं आत्मानं केवलं तु यः
- पर जो केवल आत्मा को कर्ता (kartāram + ātmānam + kevalam + tu + yaḥ)
- paśyaty akṛtabuddhitvānपश्यत्य् अकृतबुद्धित्वान्
- अपरिपक्व बुद्धि के कारण देखता है (paśyati + akṛta-buddhitvāt)
- na sa paśyati durmatiḥन स पश्यति दुर्मतिः
- वह दुर्बुद्धि नहीं देखता (na + saḥ + paśyati + durmatiḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The word Krishna uses for this mistake — durmati, perverted or evil intelligence — is strong language for what is, in practice, the single most ordinary sentence a person says all day: “I did this.” The claim being made is not that this habit of speech is a minor imprecision but that it’s a serious misreading of what’s actually happening whenever anyone takes credit or blame for an action.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- ध्यान दीजिए कि किसी काम के अच्छा या बुरा होने पर आप कितने स्वाभाविक रूप से कह देते हैं 'यह मैंने किया'। वहीं रुकिए और उन दूसरे कारकों के नाम लीजिए जिनसे वह परिणाम बना — समय, परिस्थिति, दूसरे लोगों का योगदान। अकेले स्वामित्व की पकड़ ढीली करने का मतलब ज़िम्मेदारी छोड़ देना नहीं है; इसका मतलब है परिणाम को अधिक सही ढंग से देखना।
व्यावसायिक
- जब कोई प्रोजेक्ट सफल या असफल हो, तो पूरा श्रेय अपने नाम करने या पूरा दोष अपने सिर लेने की सहज प्रवृत्ति से बचें — उन वास्तविक कारकों के नाम लें जिन्होंने परिणाम को आकार दिया: साथी, समय, साधन। सारा श्रेय लेने या सारा दोष ओढ़ लेने — दोनों की तुलना में अधिक सटीक श्रेय-निर्धारण बेहतर निर्णयों की ओर ले जाता है।
परिवार और समाज
- जब परिवार में कोई परिणाम अच्छा या बुरा निकले — बच्चे के अंक, या मिलकर बनाई कोई योजना जो पूरी न हो सकी — तो उसे पूरी तरह किसी एक व्यक्ति के किए पर डाल देने से बचें। जिन कई कारकों ने मिलकर वास्तव में उसे जन्म दिया, उनके नाम लेना अधिक न्यायपूर्ण है, और जो सचमुच हुआ उसके अधिक निकट भी।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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