2.57

संस्कृत

यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् । नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥

yaḥ sarvatrānabhisnehas tat tat prāpya śubhāśubham nābhinandati na dveṣṭi tasya prajñā pratiṣṭhitā

अनुवाद

जो सब ओर से आसक्ति-रहित है, और जो भी शुभ या अशुभ मिले, उसे पाकर न हर्षित होता है न द्वेष करता है, उसकी प्रज्ञा स्थिर है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक 56वें श्लोक की आंतरिक शांति को इस बात तक ले जाता है कि व्यक्ति बाहरी घटनाओं का सामना कैसे करता है: चीज़ें अच्छी निकलें या बुरी, वह न प्रसन्नता से प्रतिक्रिया करता है, न अरुचि से। “स्थिर” (प्रतिष्ठिता) इस चित्र की टेक बन जाता है — यही शब्द श्लोक 58 और 61 में ज्यों-का-त्यों लौटता है, स्थिर बुद्धि के चिह्न के रूप में। जिन दो प्रतिक्रियाओं को नकारा गया है — अभिनन्दन (प्रसन्नता से स्वागत करना) और द्वेष (पीछे हटना) — वे पिछले श्लोक के राग और क्रोध का बाहरी रूप हैं। ज्ञानी की तटस्थता रुखाई नहीं है; यह उस काँटे का अभाव है, जिसकी गीता 2.62 की शृंखला को शुरू होने के लिए ज़रूरत होती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yaḥयः
जो
sarvatrānabhisnehasसर्वत्रानभिस्नेहस्
सर्वत्र आसक्ति-रहित है (sarvatra + anabhisnehaḥ)
tat tat prāpya śubhāśubhamतत् तत् प्राप्य शुभाशुभं
उस-उस शुभ या अशुभ को पाकर (tat + tat + prāpya + śubha-aśubham)
nābhinandatiनाभिनन्दति
न प्रसन्न होता है (na + abhinandati)
na dveṣṭiन द्वेष्टि
न द्वेष करता है (na + dveṣṭi)
tasyaतस्य
उसकी
prajñā pratiṣṭhitāप्रज्ञा प्रतिष्ठिता
बुद्धि स्थिर है (prajñā + pratiṣṭhitā)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Equanimity here doesn’t erase the categories fair and foul — the verse still names them as such. What changes is only the automatic reaction of liking or disliking that follows; the perceiving stays honest while the reacting drops out. That’s a narrower, more usable claim than blank indifference to outcomes.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • स्थिर रहने के लिए आपको यह दिखावा करने की ज़रूरत नहीं कि कोई बुरा परिणाम बुरा नहीं है — उसे सही-सही नाम दीजिए, बस इस नाम देने के साथ अपने-आप उठने वाली अरुचि की लहर की ज़रूरत न रखें।

व्यावसायिक

  • आप पोस्टमॉर्टम में किसी असफल लॉन्च को पूरी ईमानदारी से असफलता कह सकते हैं, और इस आकलन को रंगने के लिए क्रोध या बचाव की भावना की ज़रूरत नहीं होती — सही-सही नाम देना और भावनात्मक प्रतिक्रिया, दोनों अलग-अलग किए जा सकते हैं।

परिवार और समाज

  • आप यह स्वीकार कर सकते हैं कि परिवार के किसी सदस्य ने जो किया, उससे सचमुच चोट पहुँची, और यह साबित करने के लिए कि आपने ध्यान दिया, क्रोध की ज़रूरत नहीं है — स्पष्ट रूप से नाम देने के लिए उसके साथ जुड़ी किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता नहीं होती।

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