संस्कृत
विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः । रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ॥
viṣayā vinivartante nirāhārasya dehinaḥ rasavarjaṃ raso'py asya paraṃ dṛṣṭvā nivartate
अनुवाद
निराहार रहने वाले देहधारी से विषय तो हट जाते हैं, पर उनका रस नहीं हटता; परम को देखकर उसका वह रस भी हट जाता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कछुए वाली उपमा पर एक ईमानदार शर्त: इन्द्रियों के विषयों से केवल दूर रहने से उनका स्वाद नहीं मिटता — लालसा उस आचरण के बाद भी बनी रह सकती है। केवल प्रत्यक्ष अनुभूति (“परम का दर्शन”) ही उस रस को मिटाती है। यह एक उपयोगी चेतावनी है कि बाहरी अनुशासन को उस भीतरी अवस्था के बराबर न समझ लिया जाए जिसे उसे पैदा करना है; यही बात श्लोक 60 में फिर से कही गई है। रस — किसी विषय का वह बचा हुआ “स्वाद”, जो विषय के चले जाने पर भी बना रहता है — वही है जिसे केवल उपवास छू नहीं सकता। यह श्लोक चुपचाप यह स्थापित करता है कि लालसा को अंततः जड़ से उखाड़ने वाली चीज़ इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि परम की अनुभूति है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- viṣayā vinivartanteविषया विनिवर्तन्ते
- विषय निवृत्त हो जाते हैं (viṣayāḥ + vinivartante)
- nirāhārasya dehinaḥनिराहारस्य देहिनः
- विषयों को ग्रहण न करने वाले देहधारी के (nirāhārasya + dehinaḥ)
- rasavarjaṃरसवर्जं
- रस को छोड़कर (rasa-varjam)
- raso'py asyaरसोऽप्य् अस्य
- इसका रस भी (rasaḥ + api + asya)
- paraṃपरं
- परम को
- dṛṣṭvā nivartateदृष्ट्वा निवर्तते
- देखकर निवृत्त हो जाता है (param + dṛṣṭvā + nivartate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This verse undercuts the confident tortoise image from the line before almost immediately: withdrawing behaviorally from sense-objects doesn’t remove the taste for them, only direct realization does. It’s a teaching correcting a likely misreading of its own prior verse in real time, refusing to let abstinence pass for the finished state.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- ध्यान दें कि कब आपने कोई काम केवल करना छोड़ा है पर उसकी लालसा अब भी बनी हुई है — यह सचमुच प्रगति है, लेकिन यह श्लोक स्पष्ट कहता है कि यह उससे मुक्त होने के समान नहीं है, इसलिए समय से पहले पूर्ण अवस्था का दावा न करें।
व्यावसायिक
- काम पर किसी बुरी आदत को छोड़ देना — जैसे बार-बार किसी डैशबोर्ड को देखते रहना या किसी आँकड़े के पीछे भागना — जबकि भीतर की लालसा कम न हुई हो, एक कमज़ोर जीत है; यह मान लेने के बजाय कि केवल व्यवहार में आया बदलाव टिकाऊ है, दबाव में फिर से उसी आदत में लौट जाने की आशंका रखें।
परिवार और समाज
- यदि आपने बार-बार होने वाली बहस का सिलसिला रोक दिया है, पर भीतर अब भी पुरानी नाराज़गी महसूस होती है, तो यह घोषणा करने के बजाय कि आप उससे उबर चुके हैं, इस अंतर को ईमानदारी से स्वीकार करें — व्यवहार भावना से पहले बदल गया।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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