2.39

संस्कृत

एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु । बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ॥

eṣā te'bhihitā sāṃkhye buddhir yoge tv imāṃ śṛṇu buddhyā yukto yayā pārtha karmabandhaṃ prahāsyasi

अनुवाद

हे पार्थ, यह बुद्धि तुम्हें सांख्य के अनुसार बताई गई है; अब इसे योग के अनुसार सुनो, जिस बुद्धि से युक्त होकर तुम कर्म के बन्धन को उतार फेंकोगे।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह इस अध्याय का सबसे स्पष्ट संरचनात्मक संकेत है: कृष्ण उस शिक्षा का नाम लेते हैं जिसे उन्होंने अभी पूरा किया है (सांख्य — अमर आत्मा के विषय में सैद्धांतिक शिक्षा, श्लोक 11–30), और उसका भी जिसे वे अब आरंभ करने वाले हैं (योग — सही कर्म के विषय में एक व्यावहारिक शिक्षा)। दोनों को एक ही लक्ष्य की ओर ले जाने वाले परस्पर पूरक मार्गों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, प्रतिस्पर्धी सम्प्रदायों के रूप में नहीं, और यहाँ से श्लोक 53 तक सब कुछ इसी दूसरे, व्यावहारिक मार्ग का अंग है। जिस फल का वचन दिया गया है, वह विशिष्ट है: कर्मबन्धप्रहाण, अर्थात् कर्म के बन्धन से छूट जाना। यही वाक्यांश अध्याय 3–5 की दिशा तय करता है, जो मुख्यतः इस प्रश्न का विस्तृत उत्तर हैं कि कर्म को बन्धन में डाले बिना कैसे किया जा सकता है — और बुद्धि को यहाँ उस साधन के रूप में बताया गया है जिससे यह होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

eṣā te'bhihitā sāṃkhyeएषा तेऽभिहिता सांख्ये
सांख्य में तुम्हें बताई गई यह (te + abhihitā + sāṃkhye)
buddhirबुद्धिः
बुद्धि है
yoge tv imāṃ śṛṇuयोगे त्व् इमां शृणु
अब इसे योग में सुनो (yoge + tu + imām + śṛṇu)
buddhyā yukto yayāबुद्ध्या युक्तो यया
जिस बुद्धि से युक्त होकर (buddhyā + yuktaḥ + yayā)
pārthaपार्थ
हे पार्थ
karmabandhaṃकर्मबन्धं
कर्म के बंधन को (karma-bandham)
prahāsyasiप्रहास्यसि
तुम त्याग दोगे

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Notice the promise attached to each track is different, not just the label. Sāṅkhya has told Arjuna what’s permanently true regardless of what he does; Yoga is introduced with a claim about what doing well will accomplish — “cast away the bonds of action.” One track changes what you know, the other changes what your actions do to you. That’s a meaningfully different kind of teaching, not a restatement in new terms.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप अटक जाएँ, तो पहचानें कि आपको समझ में बदलाव की ज़रूरत है — यानी स्थिति को अलग ढंग से देखने की — या तरीके में बदलाव की — यानी अलग ढंग से काम करने की। ये दोनों अलग-अलग समस्याएँ सुलझाते हैं, और जब आपको एक की ज़रूरत हो तब केवल दूसरे को अपनाने से आप आगे नहीं बढ़ पाएँगे।

व्यावसायिक

  • जब कोई टीम किसी कठिन समस्या पर अटकी हो, तो जाँचें कि कमी वैचारिक है (वे व्यवस्था को समझते नहीं हैं) या प्रक्रियागत (वे उसे समझते तो हैं, पर उनके पास काम करने लायक कोई तरीका नहीं है) — वास्तव में कमी इनमें से कौन-सी है, इसके अनुसार समाधान पूरी तरह अलग दिखता है।

परिवार और समाज

  • जब कोई बार-बार होने वाला टकराव सुलझ नहीं रहा हो, तो देखें कि क्या आप स्थिति के तथ्यों पर सचमुच असहमत हैं, या बस उन तथ्यों पर, जिन पर आप दोनों पहले से सहमत हैं, अमल करने का कोई व्यावहारिक तरीका अभी तक नहीं खोज पाए हैं — इन दोनों के लिए बहुत अलग तरह की बातचीत चाहिए।

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