संस्कृत
दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय । बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः ॥
dūreṇa hy avaraṃ karma buddhiyogād dhanañjaya buddhau śaraṇam anviccha kṛpaṇāḥ phalahetavaḥ
अनुवाद
हे धनञ्जय, बुद्धियोग की तुलना में कर्म बहुत ही निम्न है। तुम बुद्धि की शरण खोजो; जो फल के लिए कर्म करते हैं, वे दयनीय हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
एक दो-टूक तुलना: केवल कर्म, जो उसके परिणामों के लिए किया जाता है, बुद्धियोग से किए गए कर्म से बहुत नीचे है — बुद्धियोग, यानी वह विवेकशील और दृढ़ निश्चय वाला मन, जिसका परिचय श्लोक 41 में दिया गया था। “फल के लिए कर्म करने वाले दयनीय हैं” — यह वाक्य श्लोक 47 के निर्देश को केवल एक नियम के रूप में नहीं, बल्कि एक मूल्य-निर्णय के रूप में दोहराता है, और अगले श्लोक की उस बात की भूमिका बाँधता है कि इसका विकल्प वास्तव में कैसा दिखता है।
बुद्धौ शरणम् अन्विच्छ — “बुद्धि की शरण लो” — यह वाक्यांश ध्यान खींचता है: विवेक की क्षमता को एक आश्रय के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जैसे अन्यत्र किसी देवता को। यहाँ बुद्धियोग का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया है, और इस अध्याय में इसे सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- dūreṇa hy avaraṃ karmaदूरेण ह्य् अवरं कर्म
- कर्म निश्चय ही बहुत निम्न है (dūreṇa + hi + avaram + karma)
- buddhiyogādबुद्धियोगाद्
- बुद्धियोग की तुलना में (buddhi-yogāt)
- dhanañjayaधनञ्जय
- हे धनञ्जय
- buddhau śaraṇam anvicchaबुद्धौ शरणं अन्विच्छ
- बुद्धि में शरण खोजो (buddhau + śaraṇam + anviccha)
- kṛpaṇāḥकृपणाः
- दयनीय हैं
- phalahetavaḥफलहेतवः
- फल के लिए कर्म करने वाले (phala-hetavaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Verse 47 gave Arjuna a rule — you have a right to action, not to its fruits. This verse doesn’t add another argument for that rule; it adds a feeling about it, calling fruit-seekers pitiable. A rule asks for compliance; a verdict asks you to reconsider which kind of person you want to be counted among — a sharper kind of persuasion than repeating the instruction itself.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- ध्यान दें कि कब आप किसी नियम का पालन केवल बाध्यता के कारण कर रहे हैं और कब इसलिए कि आपने सचमुच फिर से सोचा है कि आप कैसा व्यक्ति बनना चाहते हैं — दूसरी तरह की प्रेरणा दबाव में भी उस तरह टिकी रहती है, जैसे केवल आज्ञापालन शायद ही कभी टिक पाता है।
व्यावसायिक
- जब सिर्फ़ नीति से आपकी टीम का व्यवहार नहीं बदल रहा हो, तो नियम को फिर से दोहराने के बजाय यह स्पष्ट करके देखें कि उसकी अनदेखी करने से कोई व्यक्ति वास्तव में किस तरह का इंजीनियर या लीडर बनता है — पहचान अक्सर लोगों को दोहराव से कहीं अधिक प्रेरित करती है।
परिवार और समाज
- यदि किसी को घर का कोई नियम याद दिलाना बार-बार विफल हो रहा हो, तो नियम को ही दोहराने के बजाय यह स्पष्ट करके देखें कि वह व्यवहार किस तरह के व्यक्ति को दर्शाता है — लोग अक्सर निर्देश की तुलना में पहचान पर जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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