2.15

संस्कृत

यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ । समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ॥

yaṃ hi na vyathayanty ete puruṣaṃ puruṣarṣabha samaduḥkhasukhaṃ dhīraṃ so'mṛtatvāya kalpate

अनुवाद

हे पुरुषश्रेष्ठ, जिस धीर पुरुष को ये व्यथित नहीं करते, जो दुःख और सुख में समान रहता है, वही अमरत्व के योग्य होता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह पिछले श्लोक का सीधा परिणाम है: जो व्यक्ति सचमुच सुख और दुःख से विचलित नहीं होता — उनके प्रति सुन्न नहीं, बल्कि उनसे डगमगाता नहीं — उसे “अमृतत्व के योग्य” कहा गया है, अर्थात् वह कृष्ण के तर्क को केवल शब्दों में सुनने के बजाय वास्तव में ग्रहण करने की स्थिति में है। “सम-दुःख-सुख” — दुःख और सुख में सम — समत्व का पहला उल्लेख है, वही समता जिसे गीता 2.48 स्पष्ट रूप से योग के रूप में परिभाषित करेगा। यहाँ इसे अमृतत्व की योग्यता के रूप में कहा गया है; वहाँ यह एक विधि बन जाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yaṃ hiयं हि
जिसे निश्चय ही (yam + hi)
na vyathayantyन व्यथयन्त्य्
व्यथित नहीं करते (na + vyathayanti)
eteएते
ये
puruṣaṃपुरुषं
पुरुष को
puruṣarṣabhaपुरुषर्षभ
हे पुरुषश्रेष्ठ
samaduḥkhasukhaṃसमदुःखसुखं
दुःख और सुख में समान रहने वाले (sama-duḥkha-sukham)
dhīraṃधीरं
धीर
so'mṛtatvāyaसोऽमृतत्वाय
वह अमरत्व के लिए (saḥ + amṛtatvāya)
kalpateकल्पते
योग्य होता है

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Verse 14 gave an instruction (endure); this verse quietly supplies the test for whether it’s working — not the absence of pleasure and pain, but no longer being destabilized by them. That’s a meaningfully different bar than “feeling nothing,” and it converts the previous verse’s demand into something checkable: are you still the same person after the good news and the bad news, or not?

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • स्थिरता की ओर अपनी प्रगति को इस बात से न मापें कि अच्छी और बुरी ख़बरें अब भी आप पर असर करती हैं या नहीं — इसे इस बात से मापें कि क्या वे अब भी आपको अपनी राह से भटका देती हैं। उन्हें महसूस करना ठीक है; उनसे डगमगा जाना ही वह असली बात है जिस पर काम करना है।

व्यावसायिक

  • जब आप यह आँक रहे हों कि कोई व्यक्ति दबाव में अधिक ज़िम्मेदारी के लिए तैयार है या नहीं, तो ऐसे व्यक्ति की तलाश न करें जो असफलताओं पर कोई प्रतिक्रिया ही न दे — ऐसे व्यक्ति को देखें जो प्रतिक्रिया करता है और फिर भी अपनी राह पर टिका रहता है। यह एक सार्थक रूप से अलग और अधिक उपयोगी मानदंड है।

परिवार और समाज

  • अपने आप से या किसी प्रियजन से यह अपेक्षा न रखें कि वे कठिन दौर के उतार-चढ़ाव को महसूस करना बंद कर दें — आप कैसा कर रहे हैं, इसका अधिक ईमानदार पैमाना यह है कि क्या उसके बाद भी आप पहले की तरह ही काम कर पा रहे हैं, न कि यह कि आपने कुछ भी महसूस नहीं किया।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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