संस्कृत
अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः । निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम् ॥
avācyavādāṃś ca bahūn vadiṣyanti tavāhitāḥ nindantas tava sāmarthyaṃ tato duḥkhataraṃ nu kim
अनुवाद
तुम्हारे शत्रु तुम्हारे सामर्थ्य की निन्दा करते हुए बहुत-सी न कहने योग्य बातें कहेंगे। उससे बढ़कर दुःखदायी और क्या होगा?
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
सामाजिक कीमतों की सूची की यह अंतिम और सबसे तीखी बात है: केवल साथी ही नहीं, शत्रु भी अर्जुन के पीछे हटने को कमज़ोरी समझेंगे — उसके शत्रुओं को उसकी मात्र पसंद का ही नहीं, बल्कि स्वयं उसकी क्षमता का उपहास करने का मसाला मिल जाएगा। यह अलंकारिक प्रश्न श्लोक 34–36 को एक इकाई के रूप में समाप्त करता है, जिसमें हर श्लोक पीछे हटने की कीमत को और बढ़ाता जाता है। यह बढ़त साथियों → समकक्षों → शत्रुओं के क्रम में चलती है, और तिरस्कार का विषय अर्जुन के सम्मान से सिमटकर उसके सामर्थ्य, यानी उसकी निरी योग्यता, तक आ जाता है। “इससे अधिक दुःखदायी क्या होगा?” — इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया, क्योंकि जिस योद्धा के दृष्टिकोण के भीतर रहकर कृष्ण तर्क दे रहे हैं, उसमें ऐसा कुछ है ही नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- avācyavādāṃś ca bahūnअवाच्यवादांश् च बहून्
- और बहुत-से न कहने योग्य वचन (avācya-vādān + ca + bahūn)
- vadiṣyantiवदिष्यन्ति
- कहेंगे
- tavāhitāḥतवाहिताः
- तुम्हारे शत्रु (tava + ahitāḥ)
- nindantasनिन्दन्तस्
- निन्दा करते हुए
- tavaतव
- तुम्हारी
- sāmarthyaṃसामर्थ्यं
- सामर्थ्य, क्षमता
- tatoततो
- उससे
- duḥkhataraṃदुःखतरं
- अधिक दुःखदायी
- nu kimनु किं
- भला क्या है? (nu + kim)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Read together, verses 34 through 36 map three concentric circles of judgment — one’s own sense of honor, the esteem of peers, and finally the mockery of enemies who have no stake in being fair. Krishna works outward through the full social field a withdrawal would touch, leaving no audience unaccounted for, which is exactly what makes the closing rhetorical question feel earned rather than merely dramatic.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- कोई ऐसा निर्णय लेने से पहले, जिस पर दूसरे लोग प्रतिक्रिया देंगे, सोचिए कि प्रभावित होने वाले सभी तरह के लोगों को वह कैसा लगेगा — केवल आपके सबसे निकट के लोगों को ही नहीं, बल्कि तटस्थ और यहाँ तक कि विरोधी देखने वालों को भी, क्योंकि हर कोई एक ही कार्य का अर्थ अलग-अलग ढंग से लगाएगा।
व्यावसायिक
- कोई ऐसा निर्णय लागू करने से पहले, जो आपकी अपनी टीम के बाहर भी दिखाई देगा, अच्छी तरह सोच लें कि वह आपकी अपनी टीम को, साथी टीमों को और आलोचकों या प्रतिस्पर्धियों को कैसा लगेगा — जो निर्णय किसी मित्रवत दायरे के भीतर से ठीक लगता है, वह किसी असहानुभूतिपूर्ण बाहरी लोगों को बहुत अलग लग सकता है।
परिवार और समाज
- किसी ऐसी बात पर कदम उठाने से पहले, जिसका असर बड़े परिवार या सामाजिक दायरे पर पड़ता हो, सोचिए कि उसे केवल आपके सबसे निकट के लोग ही नहीं, बल्कि दूर के और यहाँ तक कि असहानुभूति रखने वाले संबंधी भी कैसे देखेंगे — सभी तरह की प्रतिक्रियाओं का पहले से अनुमान लगाना उचित है, भले ही इससे आपके किए जाने वाले कार्य में कोई बदलाव न आए।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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