2.42

संस्कृत

यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः । वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः ॥

yām imāṃ puṣpitāṃ vācaṃ pravadanty avipaścitaḥ vedavādaratāḥ pārtha nānyad astīti vādinaḥ

अनुवाद

हे पार्थ, वेद के शब्दों में रमे रहने वाले और 'इसके सिवा और कुछ नहीं है' ऐसा कहने वाले अविवेकी लोग यह फूलों-सी सजी हुई वाणी बोलते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण यहाँ वेदों के शब्दार्थ से चिपकी धार्मिकता की तीखी आलोचना शुरू करते हैं — स्वयं वेदों की नहीं, बल्कि उन लोगों की जो अलंकृत कर्मकाण्डी भाषा को ही सम्पूर्ण ज्ञान समझ बैठते हैं और इस बात पर अड़े रहते हैं कि इससे परे कुछ भी नहीं है। “पुष्पित वाणी” ही इसकी पहचान है: विस्तृत, लुभावनी, और — जैसा कि अगले दो श्लोक स्पष्ट करते हैं — कामनाओं के एक काफ़ी सीमित दायरे पर केंद्रित। पुष्पिता — “खिली हुई”, सजावटी — ऐसी फीकी प्रशंसा है जो आलोचना बन जाती है: यह वाणी ठीक वहीं आकर्षक है जहाँ उसे सीधी-सादी होना चाहिए। निशाना न अन्यद् अस्ति वाला दावा है, “इस अनुष्ठान से ऊँचा कुछ भी नहीं है”, न कि स्वयं अनुष्ठान।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

yām imāṃ puṣpitāṃ vācaṃयां इमां पुष्पितां वाचं
यह दिखावटी, फूलों जैसी वाणी (yām + imām + puṣpitām + vācam)
pravadantyप्रवदन्त्य्
बोलते हैं
avipaścitaḥअविपश्चितः
अविवेकी लोग
vedavādaratāḥवेदवादरताः
वेद के शब्दों में रमे हुए (veda-vāda-ratāḥ)
pārthaपार्थ
हे पार्थ
nānyad astītiनान्यद् अस्तीति
'इसके सिवा और कुछ नहीं है' — यह कहते हुए (na + anyat + asti + iti)
vādinaḥवादिनः
ऐसा कहने वाले

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna’s first move against literalist ritualism is stylistic, not substantive — he flags the language itself (“flowery speech”) before he ever explains what’s wrong with the underlying claim in verses 43-44. That ordering is worth noticing on its own: eloquence and persuasiveness are called out as a hazard independent of whether the content turns out to be right or wrong.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब कोई विचार या सलाह असामान्य निखार या वाक्पटुता के साथ प्रस्तुत की जाए, तो इसे रुककर उसके सार को परखने का कारण मानें, इस बात का प्रमाण नहीं कि वह सार सही है — प्रभावशाली प्रस्तुति और सही होना दो अलग बातें हैं।

व्यावसायिक

  • जब कोई प्रस्ताव या विक्रेता की प्रस्तुति असामान्य रूप से अच्छी तरह तैयार की गई हो या भाषा में बहुत सधी हुई हो, तो प्रस्तुति के अपने आकलन को उसके मूल दावों के आकलन से अलग रखें — निखार इस बात का संकेत है कि मेहनत कितनी की गई, इस बात का नहीं कि बात सही है।

परिवार और समाज

  • जब परिवार के किसी निर्णय में कोई व्यक्ति किसी बात के पक्ष में भावनात्मक रूप से प्रभावशाली तर्क रखे, तो उसके मूल दावे को इस बात से अलग करके पहचानने का प्रयास करें कि वह कितने विश्वसनीय ढंग से कहा गया — ये दोनों उस क्षण जितने जुड़े हुए लगते हैं, उससे कहीं अधिक अलग हो सकते हैं।

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