संस्कृत
यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके । तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः ॥
yāvān artha udapāne sarvataḥ samplutodake tāvān sarveṣu vedeṣu brāhmaṇasya vijānataḥ
अनुवाद
चारों ओर जल की बाढ़ आ जाने पर एक कुएँ का जितना प्रयोजन रह जाता है, ज्ञानी ब्राह्मण के लिए सभी वेदों का उतना ही प्रयोजन है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कर्मकाण्ड की पूरी आलोचना के लिए यह समापन का एक यादगार बिम्ब है: जब बाढ़ सारी धरती को ढक लेती है, तो पानी निकालने के लिए खोदा गया छोटा जलाशय कुछ नया नहीं जोड़ता। वेदों को असत्य घोषित नहीं किया गया है। बस इतना कहा गया है कि प्रत्यक्ष समझ आ जाने पर उपयोगिता में वे पीछे छूट जाते हैं। यह घटते सीमांत मूल्य का दावा है, शास्त्र का खंडन नहीं। श्लोक 47 से कृष्ण का सीधा, व्यावहारिक उपदेश आरम्भ होता है, और यह उससे पहले की तैयारी का अंतिम चरण है। यह बिम्ब सावधानी से सीमित रखा गया है: कुआँ बाढ़ आने तक सचमुच उपयोगी होता है; वेद का कर्मकाण्ड वाला भाग साक्षात्कार होने तक सचमुच उपयोगी होता है। अध्याय 3 इस बात पर बल देकर संतुलन फिर से स्थापित करता है कि साक्षात्कार प्राप्त कर चुका व्यक्ति भी कर्म करता है (गीता 3.20)।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yāvān artha udapāneयावान् अर्थ उदपाने
- कुएँ में जितना प्रयोजन होता है (yāvān + arthaḥ + udapāne)
- sarvataḥ samplutodakeसर्वतः संप्लुतोदके
- जब चारों ओर जल ही जल भरा हो (sarvataḥ + sampluta-udake)
- tāvānतावान्
- उतना ही
- sarveṣu vedeṣuसर्वेषु वेदेषु
- सब वेदों में (sarveṣu + vedeṣu)
- brāhmaṇasyaब्राह्मणस्य
- ब्राह्मण के लिए
- vijānataḥविजानतः
- जो जानता है
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This is the chapter’s first extended image rather than a direct proposition — a tank swallowed by floodwater. It arrives exactly where propositional argument about the Vedas’ relative value would otherwise need several more verses to establish; one concrete picture does in a line what abstract argument would take longer to earn, right before Krishna drops argument almost entirely for direct instruction in verse 47.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी दृष्टिकोण में आए बदलाव को तर्क के सहारे समझाने की कोशिश कर रहे हों और बात सामने वाले तक न पहुँच रही हो, तो इसके बजाय एक ठोस चित्र आज़माकर देखें। सोच-समझकर चुना गया एक चित्र एक ही पंक्ति में वह बात पहुँचा सकता है, जिसे कई और अनुच्छेदों के तर्क से कहने में कहीं अधिक समय लगता।
व्यावसायिक
- जब किसी तकनीकी ट्रेड-ऑफ़ की लिखित व्याख्या को समझ में आने के लिए बार-बार और शर्तें जोड़नी पड़ें, तो उसकी जगह एक सोच-समझकर चुना गया ठोस उदाहरण या उपमा रखकर देखें। एक अच्छा चित्र अक्सर बात का दायरा थोड़ी-थोड़ी सटीकता बढ़ाते जाने की तुलना में अधिक जल्दी स्पष्ट कर देता है।
परिवार और समाज
- जब आप किसी ऐसे व्यक्ति को, जो आपको पहले से जानता था, यह समझाने में कठिनाई महसूस करें कि आप कैसे बदल गए हैं, तो लंबी व्याख्या के बजाय एक ठोस चित्र या कहानी सामने रखकर देखें। एक अकेला सजीव उदाहरण अक्सर बदलाव के अमूर्त वर्णन से कहीं अधिक कह देता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।