2.56

संस्कृत

दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः । वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥

duḥkheṣv anudvignamanāḥ sukheṣu vigataspṛhaḥ vītarāgabhayakrodhaḥ sthitadhīr munir ucyate

अनुवाद

दुःखों में जिसका मन विचलित नहीं होता, सुखों में जिसकी कोई लालसा नहीं रहती, और जो राग, भय और क्रोध से मुक्त हो गया है, वह मुनि स्थिरबुद्धि कहलाता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 54 में पूछे गए अर्जुन के प्रश्न का उत्तर देते हुए, कृष्ण इस चित्रण का आरंभ उसके प्रसिद्ध त्रिविध सूत्र से करते हैं: दुःख में अविचलित, सुख में लालसा से रहित, और राग, भय तथा क्रोध से मुक्त। श्लोक 55 में कामनाओं को छोड़ देने की बात के साथ मिलकर, यह वह भावनात्मक आधार तय करता है जिस पर शेष चित्रण खड़ा होता है। राग, भय, क्रोध — आकर्षण, भय, क्रोध — को एक समूह के रूप में इसलिए गिनाया गया है क्योंकि ये एक कारण-क्रम हैं: बाधित आकर्षण हानि का भय बन जाता है, और वह भय क्रोध बन जाता है। गीता 2.62 में विनाश की शृंखला यही सूची है, जिसे एक तंत्र में बदल दिया गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

duḥkheṣv anudvignamanāḥदुःखेष्व् अनुद्विग्नमनाः
दुःखों में जिसका मन विचलित नहीं होता (duḥkheṣu + anudvigna-manāḥ)
sukheṣu vigataspṛhaḥसुखेषु विगतस्पृहः
सुखों में जिसकी कोई लालसा नहीं रहती (sukheṣu + vigata-spṛhaḥ)
vītarāgabhayakrodhaḥवीतरागभयक्रोधः
राग, भय और क्रोध से मुक्त (vīta-rāga-bhaya-krodhaḥ)
sthitadhīrस्थितधीः
स्थिर बुद्धि वाला (sthita-dhīḥ)
munirमुनिः
मुनि
ucyateउच्यते
कहलाता है

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The threefold formula isn’t one flattened neutrality — undisturbed amid pain is endurance, indifferent amid pleasure is non-grasping, and these are two different postures aimed in opposite directions, not a single numbness applied evenly. The verse asks for two distinct skills, not one absence of feeling.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

Site Commentary — Second Reading

What’s being described is not an absence of reaction but the absence of a specific, common failure: a mood that tracks the last input received — a market dip, a curt message from a boss, a notification — as faithfully as a needle tracks a magnet. Most people don’t notice how thoroughly their stability is outsourced this way until someone points at the pattern directly, which is what sthitadhīḥ, “stable in understanding,” is naming by contrast. The verse isn’t asking for indifference to life; it’s naming the specific, ordinary dependency most people live inside without ever calling it that.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • इन्हें एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग कौशलों के रूप में साधिए: कठिन क्षणों को बिना डगमगाए सहना, और अच्छे क्षण आने पर उन्हें पकड़कर न बैठना — इनके लिए अलग-अलग क्षमताएँ चाहिए, और इन दोनों को मिलाकर "कम महसूस करो" बना देने से दोनों ही छूट जाते हैं।

व्यावसायिक

  • कड़ी आलोचना को बिना विचलित हुए स्वीकार कीजिए, और प्रशंसा के नशे में भी मत आइए — ये दो अलग-अलग पेशेवर अनुशासन हैं, और जिस टीम ने इनमें से केवल एक ही विकसित किया है, वह केवल आधी ही स्थिर है।

परिवार और समाज

  • परिवार के साथ कठिन दौर में टूटिए मत, और किसी बहुत अच्छे दौर में बहक भी मत जाइए — ध्यान दीजिए कि ये विकसित करने योग्य दो अलग-अलग आदतें हैं, भावनाओं से एक सर्वव्यापी अलगाव नहीं।

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