संस्कृत
बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च । सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् ॥
bahir antaś ca bhūtānām acaraṃ caram eva ca sūkṣmatvāt tad avijñeyaṃ dūrasthaṃ cāntike ca tat
अनुवाद
वह सभी प्राणियों के बाहर भी है और भीतर भी, अचर भी है और चर भी। सूक्ष्म होने के कारण वह जाना नहीं जा सकता; वह दूर भी स्थित है और निकट भी।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
विरोधाभासी जोड़े और भी हैं — सभी प्राणियों के भीतर और बाहर, एक साथ अचल और चल — और फिर श्लोक इस विरोधाभास के पीछे का वास्तविक कारण बताता है: उसका अगोचर होना उसकी सूक्ष्मता (सौक्ष्म्य) के कारण है। यह अकेला शब्द सचमुच बड़ा काम करता है; यह पिछले दो श्लोकों के विरोधाभासों को उस वस्तु के किसी दोष के रूप में नहीं, बल्कि सामान्य बोध की सीमा के रूप में नए ढंग से प्रस्तुत करता है — एक ऐसा भेद जिसे श्लोक 33 की आकाश वाली उपमा पूरी तरह ठोस बना देगी। सूक्ष्मत्वात् — “सूक्ष्मता के कारण” — वही एक शब्द है जो सचमुच बड़ा काम करता है: यह पिछले विरोधाभासों को उस वस्तु के दोष के रूप में नहीं, बल्कि सामान्य बोध की सीमा के रूप में नए ढंग से प्रस्तुत करता है। गीता 13.33 की आकाश वाली उपमा इसे ठोस बना देती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- bahir antaś ca bhūtānāmबहिः अन्तश् च भूतानां
- प्राणियों के बाहर और भीतर (bahiḥ + antaḥ + ca + bhūtānām)
- acaraṃ caram eva caअचरं चरं एव च
- अचर और चर भी (acaram + caram + eva + ca)
- sūkṣmatvāt tad avijñeyaṃसूक्ष्मत्वात् तद् अविज्ञेयं
- सूक्ष्म होने के कारण वह जाना नहीं जा सकता (sūkṣmatvāt + tat + avijñeyam)
- dūrasthaṃ cāntike ca tatदूरस्थं चान्तिके च तत्
- वह दूर स्थित है और पास भी (dūra-stham + ca + antike + ca + tat)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The pairing “far away and at hand” does something the earlier paradoxes don’t quite manage: it forecloses the idea that reaching this reality is a matter of distance — of going somewhere special, cultivating extraordinary circumstances, or waiting for the right conditions. Whatever’s true of its subtlety, it’s claimed to be exactly as near as it is far, which means the usual logic of needing to travel toward a goal doesn’t apply to this one.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- मन की शांति या स्पष्टता को ऐसी चीज़ मानना छोड़ दें जो सही परिस्थितियों के उस पार कहीं दूर आपकी प्रतीक्षा कर रही है — वह एकांतवास जिस पर आप अभी तक नहीं गए, जीवन का वह पड़ाव जहाँ आप अभी तक नहीं पहुँचे। यदि वह सच्ची है, तो वह इसी क्षण ठीक उतनी ही उपलब्ध है जितनी किसी कल्पित दूरी पर कभी होगी।
व्यावसायिक
- परिपक्व ऑब्ज़र्वेबिलिटी या विश्वसनीयता की कार्यप्रणाली को ऐसी चीज़ मानना छोड़ दें जो तभी संभव होगी जब आपके पास बेहतर टूल हों या ज़्यादा लोग हों — जो अनुशासन सचमुच मायने रखता है, वह आपके पास अभी जो है उसके साथ ठीक उतना ही उपलब्ध है जितना उन सब चीज़ों के साथ होता जिनकी आप प्रतीक्षा कर रहे हैं।
परिवार और समाज
- परिवार के साथ सच्ची निकटता को 'किसी दिन जब सब ठीक हो जाएगा' तक टालना छोड़ दें — यदि वह सचमुच उपलब्ध है, तो वह इसी समय, किसी साधारण-सी शाम में, ठीक उतनी ही पास है जितनी अधिक समय वाले किसी कल्पित भविष्य में होती।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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