संस्कृत
ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना । अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥
dhyānenātmani paśyanti kecid ātmānam ātmanā anye sāṅkhyena yogena karmayogena cāpare
अनुवाद
कुछ लोग ध्यान के द्वारा अपने भीतर आत्मा को आत्मा से ही देखते हैं, कुछ दूसरे सांख्य योग के द्वारा, और कुछ अन्य कर्मयोग के द्वारा।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अभी-अभी यह कहने के बाद कि पुरुष और प्रकृति को जान लेने से पुनर्जन्म का अंत हो जाता है, कृष्ण तुरंत स्वीकार करते हैं कि उस दर्शन तक पहुँचने का एक से अधिक मार्ग है: ध्यान, विश्लेषणात्मक ज्ञान का सांख्य मार्ग, और कर्मयोग — फल में आसक्ति के बिना कर्म करने का वह अनुशासन जिसे अध्याय 2 और 3 ने विस्तार से खड़ा किया था। यहाँ कर्मयोग को कई विकल्पों में से एक के रूप में गिनाना, गीता के किसी एक अध्याय को पूरी शिक्षा मान लेने के विरुद्ध एक उपयोगी जाँच है — ग्रंथ बार-बार मार्गों की इसी बहुलता की ओर लौटता है (ज्ञान बनाम भक्ति के बारे में अध्याय 12 का आरंभिक प्रश्न भी देखें)। एक ही दर्शन तक पहुँचने के तीन मार्ग: ध्यान, विश्लेषण का सांख्य मार्ग, और कर्मयोग। यहाँ कर्मयोग को कई विकल्पों में से एक के रूप में गिनाना, किसी एक अध्याय को पूरी शिक्षा मान लेने के विरुद्ध एक जाँच है — गीता बार-बार मार्गों की इसी बहुलता की ओर लौटती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- dhyānenātmani paśyanti kecidध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिद्
- कुछ लोग ध्यान के द्वारा अपने भीतर देखते हैं (dhyānena + ātmani + paśyanti + kecit)
- ātmānam ātmanāआत्मानं आत्मना
- आत्मा को, स्वयं आत्मा से (ātmānam + ātmanā)
- anye sāṅkhyena yogenaअन्ये साङ्ख्येन योगेन
- दूसरे सांख्ययोग के द्वारा (anye + sāṅkhyena + yogena)
- karmayogena cāpareकर्मयोगेन चापरे
- और अन्य लोग कर्मयोग के द्वारा (karma-yogena + ca + apare)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Having just made the chapter’s strongest claim, Krishna immediately dilutes any sense that there’s one correct way to arrive there — meditation, analytical knowledge, and the disciplined action of karma yoga all get named in the same breath. It’s the same reflex chapter 12 opens with, offering jnana and bhakti side by side rather than ranking them, and it recurs often enough across the text to be a pattern rather than a one-off hedge.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जैसे ही आपको वह अभ्यास मिल जाए जो आपके लिए कारगर है, यह मान लेने से बचें कि केवल वही कारगर हो सकता है — यह श्लोक अपना सबसे प्रबल दावा रखता है और तुरंत उसी मंज़िल तक पहुँचाने वाले दो अन्य मार्गों का नाम लेता है। जब भी आपको लगे कि आपकी पद्धति ही एकमात्र पद्धति है, तब यह आदत अपनाने योग्य है।
व्यावसायिक
- जब आपको वह तकनीकी तरीका मिल जाए जिससे आपकी समस्या हल हुई, तो उसे एकमात्र मार्ग के रूप में नहीं, बल्कि एक परखे हुए मार्ग के रूप में प्रस्तुत करें — उन विकल्पों का नाम लेने में, जिनसे कोई टीम उसी परिणाम तक पहुँच सकती थी, आपका कुछ नहीं जाता, और इससे किसी और के अलग रास्ते के लिए द्वार खुला रहता है।
परिवार और समाज
- यदि सामना करने के किसी विशेष तरीके ने आपको किसी कठिन दौर से निकलने में मदद की, तो उसे किसी और के सामने नुस्खे की तरह नहीं, बल्कि कई विकल्पों में से एक के रूप में रखें — जिस चीज़ ने आपको वहाँ तक पहुँचाया, ज़रूरी नहीं कि वही उन्हें भी वहाँ तक पहुँचाए।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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