13.21

संस्कृत

कार्यकारणकर्तृत्वे हेतुः प्रकृतिरुच्यते । पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ॥

kāryakāraṇakartṛtve hetuḥ prakṛtir ucyate puruṣaḥ sukhaduḥkhānāṃ bhoktṛtve hetur ucyate

अनुवाद

कार्य और करण के कर्तापन में प्रकृति को कारण कहा जाता है, और सुख-दुःख के भोगने में पुरुष को कारण कहा जाता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 20 ने यह स्थापित किया कि दोनों में से कोई भी तत्त्व दूसरे को उत्पन्न नहीं करता; यह श्लोक इसके बजाय उनके कार्यों का बँटवारा करता है। प्रकृति को कार्य (परिणाम) और करण (साधन) के उत्पादन में कारण (हेतु) कहा गया है — वह सब कुछ जिसे श्लोक 6-7 की क्षेत्र-सूची ने गिनाया था — जबकि पुरुष को विशेष रूप से सुख और दुःख के अनुभव का कारण कहा गया है। यह विषमता ही पूरा तर्क है: प्रकृति क्रिया करती है, पुरुष अनुभव करता है, और दूसरी भूमिका को पहली समझ लेना ठीक वही भूल है जिसे सुधारने की ओर यह अध्याय श्लोक 30 तक बढ़ रहा है। गीता 13.20 ने कहा था कि कोई भी दूसरे को उत्पन्न नहीं करता; यह श्लोक उनके कार्यों का बँटवारा करता है। प्रकृति क्रिया करती है, पुरुष अनुभव करता है, और दूसरी भूमिका को पहली समझ लेना ठीक वही भूल है जिसे यह अध्याय गीता 13.30 तक सुधार देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

kāryakāraṇakartṛtveकार्यकारणकर्तृत्वे
परिणाम और साधन के कर्तापन में (kārya-kāraṇa-kartṛtve)
hetuḥ prakṛtir ucyateहेतुः प्रकृतिः उच्यते
प्रकृति को कारण कहा जाता है (hetuḥ + prakṛtiḥ + ucyate)
puruṣaḥ sukhaduḥkhānāṃपुरुषः सुखदुःखानां
पुरुष, सुख-दुःखों के (puruṣaḥ + sukha-duḥkhānām)
bhoktṛtve hetur ucyateभोक्तृत्वे हेतुः उच्यते
भोगने में कारण कहा जाता है (bhoktṛtve + hetuḥ + ucyate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The verse’s two halves are grammatically symmetric — hetuḥ…ucyate, “is called the cause,” repeated for both prakriti and purusha — but the symmetry disguises an asymmetry underneath it. One is called the cause of producing effects, the other only of experiencing them; the matching sentence structure makes two very different kinds of causation look, for a moment, like equals.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आपके जीवन में जो चीज़ वास्तव में परिणाम उत्पन्न करती है, उसे उस चीज़ से अलग करके देखें जो केवल उन परिणामों का अनुभव करती है — इन दोनों को एक मान लेना, यानी यह सोचना कि आपकी प्रतिक्रियाएँ और आपकी परिस्थितियाँ एक ही चीज़ हैं, ठीक वही भ्रम है जिसे रोकने के लिए यह श्लोक रचा गया है।

व्यावसायिक

  • उस व्यवस्था को, जो किसी घटना को उत्पन्न करती है, उस व्यक्ति से अलग पहचानें जो उसकी पीड़ा झेलता है — 'पाइपलाइन विफल हो गई और ऑन-कॉल इंजीनियर को कष्ट झेलना पड़ा' जैसा देखने में संतुलित लगने वाला वाक्य एक असमानता को छिपा लेता है, जिसे सुधार तय करने से पहले स्पष्ट रूप से पहचान लेना उचित है।

परिवार और समाज

  • जब परिवार का कोई सदस्य परेशान हो, तो यह अलग करके देखें कि स्थिति किस कारण से बनी और उसकी पीड़ा कौन झेल रहा है — उस व्यक्ति के दुःख को ही कारण मान लेना समाधान को केवल उलझा देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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