संस्कृत
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् । एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा ॥
adhyātmajñānanityatvaṃ tattvajñānārthadarśanam etaj jñānam iti proktam ajñānaṃ yad ato 'nyathā
अनुवाद
अध्यात्म-ज्ञान में नित्य स्थित रहना और तत्त्वज्ञान के लक्ष्य का दर्शन करना — इसे ज्ञान कहा गया है; जो इससे भिन्न है, वह अज्ञान है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
सूची अपना नाम स्वयं बताकर समाप्त होती है: आत्म-ज्ञान (अध्यात्म-ज्ञान) में निरंतर स्थित रहना और तत्त्व-ज्ञान के प्रयोजन को समझना ही ज्ञान है; जो कुछ भी इसके विपरीत है, वह अज्ञान है। श्लोक 8-12 के पूरे क्रम का निष्कर्ष यही श्लोक है। यह समापन की परिभाषा पीछे लौटकर सूची के हर गुण (विनम्रता, अनासक्ति, समभाव, भक्ति) को एक ही मूल दृष्टि के रूप में दिखाती है। ये गुण कोई जाँच-सूची नहीं हैं, जिसे एक-एक करके पूरा करना हो। सूची अपना नाम स्वयं बताती है: एतत् ज्ञानम् इति प्रोक्तम्। इससे गीता 13.8 से गिनाया गया हर गुण, यानी विनम्रता, अनासक्ति, समभाव और भक्ति, पीछे लौटकर एक ही मूल दृष्टि का रूप बन जाता है। यह कोई जाँच-सूची नहीं है, जिसे एक-एक करके पूरा करना हो।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- adhyātmajñānanityatvaṃअध्यात्मज्ञाननित्यत्वं
- आत्मा के ज्ञान में निरन्तर स्थिति (adhyātma-jñāna-nityatvam)
- tattvajñānārthadarśanamतत्त्वज्ञानार्थदर्शनं
- तत्त्वज्ञान के लक्ष्य का दर्शन (tattva-jñāna-artha-darśanam)
- etaj jñānam iti proktamएतज् ज्ञानं इति प्रोक्तं
- यह ज्ञान कहा गया है (etat + jñānam + iti + proktam)
- ajñānaṃ yad ato 'nyathāअज्ञानं यद् अतो ऽन्यथा
- जो इससे भिन्न है, वह अज्ञान है (ajñānam + yat + ataḥ + anyathā)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
After four verses of granular, itemized qualities — nine or more distinct traits, no two quite alike — the list closes by collapsing everything into a hard binary: this is wisdom, everything else is ignorance. There’s no partial credit implied, no sliding scale between the two; the plurality of virtues turns out to be one thing wearing many faces, and its absence is simply named as its opposite rather than as a lesser degree of the same thing.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- अपनी प्रगति को अलग-अलग गुणों के प्रतिशत से न मापें, जैसे कहीं विनम्रता और कहीं धैर्य। इसके बजाय यह जाँचें कि क्या वे सचमुच एक सुसंगत दिशा में मिल रहे हैं, क्योंकि आपस में न जुड़ी अच्छी आदतों का ढेर उस दिशा के बराबर नहीं है, जिसमें उन सबको मिलकर ढल जाना चाहिए।
व्यावसायिक
- अपनी टीम की विश्वसनीयता से जुड़ी कार्य-पद्धतियों को ऐसी चेकलिस्ट की तरह न आँकें जिसमें हर मद अलग से आंशिक अंक पाती है। यह जाँचें कि क्या वे सचमुच मिलकर एक सुसंगत रुख बन गई हैं, क्योंकि बिखरी हुई सर्वोत्तम पद्धतियाँ, जो एक-दूसरे को मज़बूत नहीं करतीं, वास्तविक मज़बूती खड़ी कर लेने के बराबर नहीं हैं।
परिवार और समाज
- बच्चे की परवरिश को अलग-अलग गुणों की चेकलिस्ट भरने जैसा न समझें, जैसे कहीं ईमानदारी और कहीं अनुशासन। इसके बजाय यह देखें कि क्या ये प्रयास मिलकर एक सुसंगत चरित्र बना रहे हैं, क्योंकि सिखाए गए व्यवहारों की सूची अपने-आप वह व्यक्ति नहीं बन जाती जो आप चाहते हैं कि वह बने।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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