संस्कृत
यावत्सञ्जायते किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम् । क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्धि भरतर्षभ ॥
yāvat sañjāyate kiñcit sattvaṃ sthāvarajaṅgamam kṣetrakṣetrajñasaṃyogāt tad viddhi bharatarṣabha
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ, स्थावर या जंगम जो कोई भी प्राणी उत्पन्न होता है, उसे तुम क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के संयोग से उत्पन्न हुआ जानो।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
एक ब्रह्माण्ड-संबंधी दावा, जो पूरे अध्याय को व्यक्ति के उदाहरण से आगे ले जाकर सामान्य रूप देता है: जो भी प्राणी जन्म लेता है, चाहे वह चलता-फिरता हो या स्थिर, वह विशेष रूप से क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के मेल (संयोग) से उत्पन्न होता है। यह श्लोक 1-26 के सैद्धांतिक ढाँचे को सबसे बुनियादी, देखे जा सकने वाले तथ्य पर टिकाता है — कि कुछ भी जीवित है — और जन्म को ही क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ ढाँचे के पक्ष में प्रमाण मानता है, न कि ऐसी चीज़ जिसे यह ढाँचा बाद में केवल समझाता भर है। एक ब्रह्माण्ड-संबंधी सामान्यीकरण: हर जन्म क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के मेल (संयोग) से उत्पन्न होता है। यह पूरे ढाँचे को सबसे बुनियादी, देखे जा सकने वाले तथ्य पर टिकाता है — कि कुछ भी जीवित है — और जन्म को ही इस ढाँचे के पक्ष में प्रमाण मानता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yāvat sañjāyate kiñcitयावत् सञ्जायते किञ्चित्
- जो कुछ भी उत्पन्न होता है (yāvat + sañjāyate + kiñcit)
- sattvaṃ sthāvarajaṅgamamसत्त्वं स्थावरजङ्गमं
- कोई भी प्राणी, स्थावर या जंगम (sattvam + sthāvara-jaṅgamam)
- kṣetrakṣetrajñasaṃyogātक्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्
- क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ के संयोग से (kṣetra-kṣetrajña-saṃyogāt)
- tad viddhi bharatarṣabhaतद् विद्धि भरतर्षभ
- उसे ऐसा ही जानो, हे भरतश्रेष्ठ (tat + viddhi + bharata-ṛṣabha)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The claim reaches for the most ordinary fact available rather than a special case: not visions or altered states, but the plain fact that anything is born at all, mobile or immobile. Grounding the whole kshetra/kshetrajna apparatus in the least remarkable observation possible is a stronger argumentative move than reaching for something rarer would have been.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- परखिए कि आपकी कोई मान्यता सचमुच आपके जीवन के साधारण तथ्यों को समझाती है या नहीं, केवल नाटकीय तथ्यों को ही नहीं — यह श्लोक एक पूरे ढाँचे को उस सबसे सीधे-सादे तथ्य पर टिकाता है जो उपलब्ध है, कि कुछ भी जीवित है।
व्यावसायिक
- किसी आर्किटेक्चर सिद्धांत का बचाव करते समय यह दिखाएँ कि वह सिस्टम के सबसे साधारण, रोज़मर्रा के व्यवहार को कैसे समझाता है, केवल असाधारण स्थितियों को ही नहीं — जो ढाँचा केवल असाधारण घटनाओं का ही हिसाब देता है, वह सामान्य संचालन पर टिके ढाँचे से कमज़ोर होता है।
परिवार और समाज
- यदि आप कोई मूल्य अपने बच्चों तक पहुँचाना चाहते हैं, तो उसके नाटकीय उदाहरण के बजाय उसका सबसे छोटा रोज़मर्रा का उदाहरण दिखाएँ — उपलब्ध सबसे सीधा-सादा, सबसे आम तथ्य ही प्रायः सबसे विश्वसनीय प्रमाण होता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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