संस्कृत
धृत्या यया धारयते मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः । योगेनाव्यभिचारिण्या धृतिः सा पार्थ सात्त्विकी ॥ ३३ ॥
dhṛtyā yayā dhārayate manaḥprāṇendriyakriyāḥ yogenāvyabhicāriṇyā dhṛtiḥ sā pārtha sāttvikī
अनुवाद
हे पार्थ, जिस अविचल धृति से मनुष्य योग के द्वारा मन, प्राण और इन्द्रियों की क्रियाओं को धारण करता है, वह धृति सात्त्विकी है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
सात्त्विक धृति, अर्थात् दृढ़ता या संकल्प, वह अविचल स्थिरता है जो योग से प्राप्त होती है और मन, प्राण तथा इन्द्रियों की क्रियाओं को एक साथ संयमित करती है। इस प्रसंग के उन थोड़े-से श्लोकों में यह एक है जो केवल किसी गुण-लक्षण का नहीं, बल्कि किसी विधि का नाम लेते हैं। यहाँ अनुशासित अभ्यास के रूप में योग को स्पष्ट रूप से वह साधन बताया गया है जिससे इस प्रकार का संकल्प उत्पन्न होता है। इससे गुणों का अमूर्त वर्गीकरण फिर से उस ठोस ध्यान-पद्धति से जुड़ जाता है जिसे अध्याय 6 ने विस्तार से समझाया था। सात्त्विक धृति अविचल योग के द्वारा मन, प्राण और इन्द्रियों को स्थिर रखती है। यह “वायुरहित स्थान में रखा दीपक” (गीता 6.19) है, पर यहाँ वह मन का नहीं, बल्कि दृढ़ता का गुण है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- dhṛtyā yayā dhārayateधृत्या यया धारयते
- जिस धृति से मनुष्य धारण करता है (dhṛtyā + yayā + dhārayate)
- manaḥprāṇendriyakriyāḥमनःप्राणेन्द्रियक्रियाः
- मन, प्राण और इन्द्रियों की क्रियाएँ (manaḥ-prāṇa-indriya-kriyāḥ)
- yogenāvyabhicāriṇyāयोगेनाव्यभिचारिण्या
- अविचल योग के द्वारा (yogena + avyabhicāriṇyā)
- dhṛtiḥ sā pārtha sāttvikīधृतिः सा पार्थ सात्त्विकी
- हे पार्थ, वह धृति सात्त्विकी है (dhṛtiḥ + sā + pārtha + sāttvikī)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The word translated unwavering here, avyabhicharini, shares its root with the term used elsewhere for marital fidelity, not straying. Sattvic resolve isn’t described as raw willpower or grit; it’s described as a kind of faithfulness, holding mind, breath, and senses to one committed direction the way a vow holds a person to one commitment rather than several competing ones.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- अपने अनुशासन को केवल इच्छाशक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक दिशा के प्रति निष्ठा के रूप में देखें। अपने आप से पूछिए कि क्या आप उस अभ्यास के प्रति निष्ठावान बने हुए हैं जिसे आपने चुना था, न कि बस दाँत भींचकर वह काम निपटा रहे हैं जो आज आपके सामने आ गया है।
व्यावसायिक
- किसी चुनी हुई रणनीति पर टीम के अनुशासन को लगाए गए घंटों की गिनती से नहीं, बल्कि उस दिशा के प्रति निष्ठा से आँकें, यानी हर नई सामने आने वाली प्राथमिकता के पीछे न भागने से। यह निष्ठा की कसौटी बताती है कि काम पूरा होगा या नहीं, घंटों की गिनती नहीं।
परिवार और समाज
- किसी रिश्ते में प्रतिबद्धता इच्छाशक्ति के किसी एक बड़े प्रदर्शन जैसी कम और समय के साथ एक साझा दिशा के प्रति लगातार बनी रहने वाली निष्ठा जैसी अधिक दिखती है। इसे किसी एक प्रयास की तीव्रता से नहीं, बल्कि टिके रहने से मापें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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