18.30

संस्कृत

प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये । बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी ॥ ३० ॥

pravṛttiṃ ca nivṛttiṃ ca kāryākārye bhayābhaye bandhaṃ mokṣaṃ ca yā vetti buddhiḥ sā pārtha sāttvikī

अनुवाद

हे पार्थ, जो बुद्धि प्रवृत्ति और निवृत्ति को, करने योग्य और न करने योग्य को, भय और अभय को तथा बन्धन और मोक्ष को जानती है, वह बुद्धि सात्त्विक है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

सात्त्विक बुद्धि प्रवृत्ति और निवृत्ति में, उचित और अनुचित कर्म में, भय और अभय में, तथा बन्धन और मोक्ष में ठीक-ठीक भेद करती है। ध्यान दें कि यहाँ बुद्धि को पूरी तरह भेद करने वाली क्षमता के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। सात्त्विक बुद्धि किसी विशेष मान्यता या गुण से परिभाषित नहीं होती, बल्कि उन चीज़ों को अलग-अलग पहचानने की क्षमता से परिभाषित होती है जो सचमुच भिन्न हैं। अगले दो श्लोक ठीक इसी क्षमता के बिगड़ जाने को दिखाएँगे। सात्त्विक बुद्धि प्रवृत्ति/निवृत्ति को जानती है, अर्थात् कब कर्म करना है और कब रुकना है। यह वही योग्यता है जिसके बारे में गीता 16.7 ने कहा था कि आसुरी स्वभाव वालों में इसका अभाव होता है। यह बुद्धि बन्धन और मोक्ष को सही रूप में देखती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

pravṛttiṃ ca nivṛttiṃ caप्रवृत्तिं च निवृत्तिं च
कर्म में प्रवृत्त होना और उससे विरत होना (pravṛttim + ca + nivṛttim + ca)
kāryākārye bhayābhayeकार्याकार्ये भयाभये
करने योग्य और न करने योग्य, भय और अभय (kārya-akārye + bhaya-abhaye)
bandhaṃ mokṣaṃ ca yā vettiबन्धं मोक्षं च या वेत्ति
बन्धन और मोक्ष को जो जानती है (bandham + mokṣam + ca + yā + vetti)
buddhiḥ sā pārtha sāttvikīबुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी
हे पार्थ, वह बुद्धि सात्त्विक है (buddhiḥ + sā + pārtha + sāttvikī)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The four pairs sattvic buddhi is said to discriminate escalate in stakes as they go — from the practical, what to pursue and what to avoid, through the emotional, fear and fearlessness, to the largest possible frame, bondage and liberation. The verse isn’t listing four unrelated skills; it’s describing one discriminating capacity operating at every scale, from the day’s decision to the ultimate one.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • अपने विवेक को जीवन के सबसे बड़े प्रश्नों के साथ-साथ रोज़ के छोटे-छोटे निर्णयों पर भी परखिए — जिस विवेक पर भरोसा किया जा सके, उसे हर स्तर पर एक-सा खरा उतरना चाहिए, न कि केवल तब जब दाँव इतने बड़े हों कि आपका ध्यान अपने आप खिंच जाए।

व्यावसायिक

  • किसी बड़े जोखिम वाले रणनीतिक दाँव पर एक नेतृत्वकर्ता का विवेक उतना ही भरोसेमंद है जितना वही विवेक रोज़ के छोटे निर्णयों में दिखाई देता है — किसी एक बड़े निर्णय से बने भरोसे को बाकी सब पर लागू करने से पहले देखें कि हर स्तर पर उसमें एकरूपता है या नहीं।

परिवार और समाज

  • किसी रिश्ते में किसी व्यक्ति के विवेक पर भरोसा यह देखकर बनना चाहिए कि वह रोज़ की छोटी-छोटी बातों में कैसे निर्णय लेता है, न कि इस आधार पर पूरी तरह मान लिया जाए कि उसने कभी किसी एक बड़े संकट को कितनी अच्छी तरह सँभाला था।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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