16.7

संस्कृत

प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च जना न विदुरासुराः । न शौचं नापि चाचारो न सत्यं तेषु विद्यते ॥

pravṛttiṃ ca nivṛttiṃ ca janā na vidur āsurāḥ na śaucaṃ nāpi cācāro na satyaṃ teṣu vidyate

अनुवाद

आसुरी स्वभाव वाले लोग न तो प्रवृत्ति को जानते हैं और न निवृत्ति को। उनमें न शौच होता है, न सदाचार और न ही सत्य।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण कहते हैं कि आसुरी स्वभाव वाले लोग न प्रवृत्ति को समझते हैं, न निवृत्ति को — यह भारतीय नैतिक चिंतन का एक पारिभाषिक युग्म है, जो सही ढंग से किए गए सांसारिक कर्म में संलग्नता और अनुशासित त्याग को दर्शाता है; धर्ममय जीवन के ये दो मान्य मार्ग हैं। दोनों का न होना एक को छोड़कर दूसरे को चुनने जैसा नहीं है; यह ऐसे लोगों का वर्णन है जो इस पूरे ढाँचे से बाहर हैं, जिनमें पवित्रता, उचित आचरण, यहाँ तक कि सत्यनिष्ठा भी सक्रिय श्रेणियों के रूप में मौजूद नहीं है। इससे आगे के कई श्लोकों की भूमिका बनती है, जो ऐसे लगते हैं मानो यह फिर से गढ़ने का प्रयास हों कि जब यह पूरा ढाँचा बस अनुपस्थित हो, तो भीतर से कोई विश्वदृष्टि कैसी दिखती है। प्रवृत्ति और निवृत्ति — कब कर्म करना है और कब रुकना है — यह सबसे बुनियादी नैतिक क्षमता है, और आसुरी प्रकार के लोगों में यह श्रेणी ही नहीं होती। ऐसा नहीं कि वे गलत चुनाव करते हैं; वे यह देख ही नहीं पाते कि कोई चुनाव है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

pravṛttiṃ ca nivṛttiṃ caप्रवृत्तिं च निवृत्तिं च
न प्रवृत्ति को, न निवृत्ति को (pravṛttim + ca + nivṛttim + ca)
janā na vidur āsurāḥजना न विदुः आसुराः
आसुरी स्वभाव वाले लोग नहीं जानते (janāḥ + na + viduḥ + āsurāḥ)
na śaucaṃ nāpi cācāroन शौचं नापि चाचारो
न शुद्धि, न ही सदाचार (na + śaucam + na + api + ca + ācāraḥ)
na satyaṃ teṣu vidyateन सत्यं तेषु विद्यते
और न सत्य उनमें पाया जाता है (na + satyam + teṣu + vidyate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The verse names its diagnosis twice, once in technical vocabulary and once in plain language, within the same two lines: first the specialist pair pravṛtti/nivṛtti, then purity, propriety, and truth — terms anyone would recognize without training in dharmic categories. That doubling suggests the text isn’t only writing for readers fluent in its own technical framework; it wants the diagnosis legible even to someone who has never heard the words pravṛtti or nivṛtti before.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप अपनी ही सोच में किसी गड़बड़ी को नाम देने की कोशिश कर रहे हों, तो मन में आए पहले अमूर्त नाम पर ही न रुकें — उसे सीधी-सादी, आम भाषा में भी कहकर देखें। अगर कोई निदान सीधे शब्दों में कहे जाने पर टिक नहीं पाता, तो शायद वह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

व्यावसायिक

  • जब आप किसी तकनीकी निदान को मिले-जुले श्रोताओं के सामने रखें, तो विशेषज्ञ शब्द के तुरंत बाद उसका सरल भाषा वाला अर्थ भी दें, ठीक वैसे ही जैसे यह श्लोक प्रवृत्ति/निवृत्ति को उसी साँस में शुद्धता, उचित आचरण और सत्य के साथ रखता है। जो निष्कर्ष केवल विशेषज्ञों की समझ में आए, वह वास्तव में संप्रेषित हुआ ही नहीं।

परिवार और समाज

  • अगर आप परिवार के किसी सदस्य को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी स्थिति में क्या गलत लग रहा है, तो केवल मन में पहले आए अमूर्त शब्द पर निर्भर न रहें — उसे जितने सरल शब्दों में हो सके, फिर से कहें, ठीक वैसे ही जैसे यह श्लोक तकनीकी शब्दावली को तुरंत आम नैतिक भाषा में बदल देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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