16.13

संस्कृत

इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् । इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् ॥

idam adya mayā labdham imaṃ prāpsye manoratham idam asti idam api me bhaviṣyati punar dhanam

अनुवाद

"आज मैंने यह पा लिया है, अब इस मनोरथ को भी पूरा कर लूँगा; यह धन तो मेरे पास है ही, और भविष्य में यह और धन भी मेरा हो जाएगा।"

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यहाँ पाठ का स्वर बदलकर सीधे उद्धरण में आ जाता है — एक आंतरिक एकालाप, जो श्लोक 15 तक चलता है। यह एक विशिष्ट साहित्यिक कदम है, क्योंकि यह अध्याय अब तक आसुरी के बारे में अन्य पुरुष में ही बोलता आया है। “यह मैंने आज पा लिया, वह आगे पाऊँगा, यह धन मेरा है, और भी आएगा” — यह संचय की साधारण आत्म-बातचीत जैसा लगता है, और अध्याय की अधिक ब्रह्मांडीय निंदाओं के सामने यह मुख्यतः इसलिए ध्यान खींचता है कि यह कितना सामान्य और जाना-पहचाना है। आसुरी मन को केवल बाहर से वर्णित करने के बजाय उसकी अपनी आवाज़ में प्रस्तुत करने से यह चित्र कोरी भर्त्सना न रहकर मनोविज्ञान के रूप में असर करता है। श्लोक 13–15 आसुरी आंतरिक एकालाप हैं, जिन्हें सीधे उद्धृत किया गया है — यह एक दुर्लभ युक्ति है। इसकी लय शुद्ध संचय की है: पाया, पाऊँगा, है, होगा। हर उपवाक्य इदम् है — “यह”, “यह”, “यह” — एक ऐसा मन जो पूरी तरह अपने से बाहर है, गिनती करता हुआ।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

idam adya mayā labdhamइदं अद्य मया लब्धं
'यह मैंने आज पा लिया (idam + adya + mayā + labdham)
imaṃ prāpsye manorathamइमं प्राप्स्ये मनोरथं
इस मनोरथ को मैं पा लूँगा (imam + prāpsye + manoratham)
idam asti idam api meइदं अस्ति इदं अपि मे
यह मेरा है, और यह भी मेरा होगा (idam + asti + idam + api + me)
bhaviṣyati punar dhanamभविष्यति पुनः धनं
फिर और धन होगा' (bhaviṣyati + punaḥ + dhanam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Track the tenses across this single interior line: past achievement, future gain, present possession, future gain again. The only present-tense verb is a claim of ownership (“this is mine”); every other thought pulls the mind either backward into what’s already secured or forward into what’s still to be acquired. It’s a mind that never simply rests in the present except to tally what it owns there — a useful contrast to the settled, present-anchored steadiness the Gita praises elsewhere.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • ध्यान दें कि कब आपका अपना भीतरी संवाद वर्तमान को केवल यह गिनने के लिए छूता है कि आपके पास क्या है, जबकि हर दूसरा विचार आपको पीछे बीती जीतों की ओर या आगे भविष्य के लाभों की ओर खींचता है — यह ढर्रा, जिसे यह श्लोक सीधे-सीधे बताता है, अशांत मन का लक्षण है, महत्वाकांक्षी मन का नहीं।

व्यावसायिक

  • यदि किसी टीम की योजना-संबंधी बातचीत वर्तमान का उल्लेख केवल पिछली जीतों का श्रेय लेने के लिए करती है और तुरंत अगले लक्ष्य की ओर मुड़ जाती है, तो उस ढर्रे पर ध्यान दें जिसे यह श्लोक बताता है — जो संस्कृति हिसाब रखने के सिवा कभी वर्तमान में ठहरती ही नहीं, वह रणनीति पर नहीं, पाने की होड़ पर चल रही है।

परिवार और समाज

  • यदि आपके किसी करीबी व्यक्ति के साथ बातचीत बार-बार इस ओर भटकती है कि क्या पहले ही पा लिया गया है या आगे क्या आने वाला है, और वर्तमान को केवल किसी चीज़ पर अपना दावा जताने के लिए छूती है, तो उस ढर्रे पर ध्यान दें — यह वही बेचैन समय-दृष्टि है जो यह श्लोक बटोरने वाले मन को देता है; इसका उसी ढर्रे में जवाब देने के बजाय इसे कोमलता से पहचानकर नाम दे देना बेहतर है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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