संस्कृत
दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता । मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ॥
daivī sampad vimokṣāya nibandhāyāsurī matā mā śucaḥ sampadaṃ daivīm abhijāto 'si pāṇḍava
अनुवाद
दैवी सम्पदा मोक्ष के लिए और आसुरी सम्पदा बन्धन के लिए मानी गई है। हे पाण्डव, शोक मत करो, तुम दैवी सम्पदा लेकर जन्मे हो।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण दाँव को सीधे-सीधे सामने रखते हैं: दैवी सम्पदा मोक्ष की ओर ले जाती है, आसुरी सम्पदा बंधन की ओर — कोई बीच की श्रेणी प्रस्तुत नहीं की जाती। फिर श्लोक सिद्धांत से हटकर सीधे संबोधन पर आ जाता है: “शोक मत करो, तुम दैवी सम्पदा लेकर जन्मे हो।” सामान्य उपदेश के बीच इस तरह का व्यक्तिगत आश्वासन पूरी गीता में बार-बार आता है — सबसे प्रसिद्ध रूप से अध्याय 2 के आरंभ में और अध्याय 18 के अंत में — और यही एक कारण है कि यह ग्रंथ अपने सबसे अधिक सूचियों वाले अंशों में भी किसी शास्त्रीय ग्रंथ की तरह नहीं, बल्कि एक संवाद की तरह पढ़ा जाता है।
मा शुचः — “शोक मत करो” — गीता 2.11 में कृष्ण के उपदेश के बिल्कुल पहले शब्दों (अशोच्यान् अन्वशोचः) की प्रतिध्वनि है। यह सम्पदा भाग्य द्वारा निश्चित नहीं है: यह मता है, “[ऐसी] मानी गई” — एक प्रवृत्ति, और ऐसी प्रवृत्ति जिस पर काम किया जा सकता है, जिसे गीता 16.21 व्यवहार में उतारने योग्य बनाता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- daivī sampad vimokṣāyaदैवी संपद् विमोक्षाय
- दैवी सम्पदा मुक्ति के लिए है (daivī + sampat + vimokṣāya)
- nibandhāyāsurī matāनिबन्धायासुरी मता
- आसुरी सम्पदा बन्धन के लिए मानी गई है (nibandhāya + āsurī + matā)
- mā śucaḥ sampadaṃ daivīmमा शुचः संपदं दैवीं
- शोक मत करो, दैवी सम्पदा को लेकर (mā + śucaḥ + sampadam + daivīm)
- abhijāto 'si pāṇḍavaअभिजातो ऽसि पाण्डव
- तुम जन्मे हो, हे पाण्डव (abhijātaḥ + asi + pāṇḍava)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna offers no evidence for the claim that Arjuna is “born with divine properties” — no examples, no argument, just a flat assertion delivered at the exact moment Arjuna might reasonably wonder which side of this new binary he falls on. The reassurance works rhetorically not because it’s proven but because it’s said plainly, at the right moment, by someone Arjuna already trusts — a reminder that timing and trust can do work that argument alone can’t.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप इस उधेड़बुन में उलझते जा रहे हों कि आप किस श्रेणी में आते हैं — सक्षम हैं या नहीं, पर्याप्त अच्छे हैं या नहीं — तो ध्यान दें कि अक्सर यह संदेह ही ज़्यादा विकृत आकलन होता है, और किसी भरोसेमंद व्यक्ति का सीधा-सादा आश्वासन खुद से बहस के एक और दौर से कहीं ज़्यादा मूल्यवान हो सकता है।
व्यावसायिक
- जब कोई सक्षम सहकर्मी मन ही मन संदेह कर रहा हो कि वह किसी चुनौतीपूर्ण परियोजना के योग्य है या नहीं, तो जिस पर वह भरोसा करता है उसकी ओर से सीधा, बिना किसी शर्त के कहा गया 'इस काम के लिए आप ही सही व्यक्ति हैं' अक्सर प्रमाणों की सूची से ज़्यादा असर करता है — सही समय और भरोसे में वह वज़न हो सकता है जो तर्क में नहीं होता।
परिवार और समाज
- जब आपका कोई प्रियजन बेचैनी से सोच रहा हो कि वह मूल रूप से अच्छा है या दोषपूर्ण, तो सही समय पर सीधे-सादे शब्दों में कहा गया 'आप वह नहीं हैं जिससे आप डरते हैं' किसी भी प्रमाण-सूची से ज़्यादा मायने रख सकता है — आश्वासन को तर्क से सिद्ध करने की ज़रूरत नहीं होती, बस उसे सही समय पर सच्चे मन से कहना होता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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