16.2

संस्कृत

अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् । दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्रीरचापलम् ॥

ahiṃsā satyam akrodhas tyāgaḥ śāntir apaiśunam dayā bhūteṣv aloluptvaṃ mārdavaṃ hrīr acapalam

अनुवाद

अहिंसा, सत्य, क्रोध का अभाव, त्याग, शान्ति, चुगली न करना, प्राणियों के प्रति दया, लोभ का अभाव, कोमलता, लज्जा, चंचलता का अभाव,

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

गुणों की सूची आगे बढ़ती है, और इसकी दूसरी लहर अहिंसा (हानि न पहुँचाना) और सत्य से आरम्भ होती है — यह वही जोड़ी है जिसे बाद की योग और जैन परम्पराएँ अन्य सभी नैतिक संयमों से ऊपर स्थान देंगी। अपैशुनम् (दुर्भावनापूर्ण चुगली से मुक्ति) और अचापलम् (चंचलता से मुक्ति) जैसे शब्द एक काफ़ी सूक्ष्म नैतिक मनोविज्ञान की ओर संकेत करते हैं: पाठ केवल व्यापक गुणों के नाम नहीं गिना रहा, बल्कि उन छोटी-छोटी व्यवहारगत आदतों को भी — पीठ पीछे निंदा, बेचैनी — जो इन गुणों को क्षीण करती हैं। अब भी इस बात का कोई तर्क नहीं दिया गया है कि ये गुण अच्छे क्यों हैं; श्लोक 1–3 एक मदवार जाँच-सूची का काम करते हैं जिसमें सुनने वाले से अपेक्षा है कि वह स्वयं को पहचाने, न कि किसी दार्शनिक प्रमाण का।

दैवी गुण अधिकतर संबंधपरक और संयमकारी हैं — अहिंसा, दोष न ढूँढना, कोमलता, लोभ न करना। ये भक्त के गीता 12.13–गीता 12.19 वाले चित्र से और गीता 13.8–गीता 13.11 में दी गई ज्ञान की परिभाषा से बहुत हद तक मेल खाते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

ahiṃsā satyam akrodhasअहिंसा सत्यं अक्रोधस्
अहिंसा, सत्य, क्रोध का अभाव (ahiṃsā + satyam + akrodhaḥ)
tyāgaḥ śāntir apaiśunamत्यागः शान्तिः अपैशुनं
त्याग, शान्ति, चुगली न करना (tyāgaḥ + śāntiḥ + apaiśunam)
dayā bhūteṣv aloluptvaṃदया भूतेष्व् अलोलुप्त्वं
प्राणियों पर दया, लोभ का अभाव (dayā + bhūteṣu + aloluptvam)
mārdavaṃ hrīr acapalamमार्दवं ह्रीः अचपलं
कोमलता, लज्जा, चंचलता का अभाव (mārdavam + hrīḥ + acapalam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

A striking number of this verse’s dozen terms are alpha-privative constructions — ahiṃsā, akrodha, apaiśunam, aloluptvam, acapalam — virtue named as the absence of a vice rather than the presence of a quality. The verse’s implicit theory of character is closer to subtraction than accumulation: much of what marks a person as “divine” here is what impulses they don’t act on, not some additional trait they display.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • अगली बार जब आप कोई गुण विकसित करना चाहें, तो पहले यह देखें कि आपको क्या करना छोड़ना होगा, न कि यह कि आपको क्या जोड़ना होगा — यह श्लोक जिन गुणों की प्रशंसा करता है, उनमें से बहुत-से संयम से परिभाषित होते हैं, किसी नए कौशल को अर्जित करने से नहीं।

व्यावसायिक

  • जब आप यह आँकें कि किसी सहकर्मी को भरोसेमंद क्या बनाता है, तो ध्यान दें कि इसका कितना बड़ा हिस्सा इस बात से परिभाषित होता है कि वे क्या नहीं करते — वे चुगली नहीं करते, दबाव में भड़कते नहीं — न कि किसी अतिरिक्त प्रभावशाली कौशल से। अक्सर असली काम संयम का गुण ही कर रहा होता है।

परिवार और समाज

  • यदि आप चाहते हैं कि आपके साथ रहना आसान हो, तो कोई नई अच्छी आदत जोड़ने की खोज करने से पहले यह परखें कि आप क्या करना छोड़ सकते हैं — तीखी टिप्पणी, चुगली, गुस्से का भड़कना। यह श्लोक संकेत देता है कि जोड़ने की तुलना में संयम कहीं अधिक भार उठाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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