संस्कृत
तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् । अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः ॥
tulyanindāstutir maunī santuṣṭo yena kenacit aniketaḥ sthiramatir bhaktimān me priyo naraḥ
अनुवाद
जो निन्दा और स्तुति को समान मानता है, मौन रहता है, जो कुछ भी मिल जाए उसी में सन्तुष्ट रहता है, जिसका कोई घर नहीं और जिसकी बुद्धि स्थिर है, वह भक्तिमान मनुष्य मुझे प्रिय है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
निंदा और स्तुति में समानता (तुल्य-निंदा-स्तुतिः) सीधे गीता 2.56-57 की समता वाली भाषा की प्रतिध्वनि है, पर यह श्लोक दो ऐसे गुण भी जोड़ता है जो उस पहले के चित्रण में नहीं थे: मौन (मौनी) और गृहहीनता (अनिकेतः)। “जो कुछ भी मिल जाए” (येन केनचित्) उसमें संतोष, श्लोक 13 के सुख-दुःख के संतुलन को व्यापक बनाकर समग्र परिस्थिति के प्रति एक दृष्टिकोण बना देता है, और इससे भक्त की यह सूची उस ज्ञान-आधारित चित्रण से अधिक व्यापक सिद्ध होती है, जिसका यह अन्यथा बहुत निकटता से अनुसरण करती है। तुल्य-निंदा-स्तुतिः, “निंदा और स्तुति में समान”, गीता 2.56 की प्रतिध्वनि है, पर यह श्लोक दो ऐसे गुण जोड़ता है जो उस चित्रण में नहीं थे — मौनी (मौन) और अनिकेतः (गृहहीनता) — और इससे भक्त की सूची उस ज्ञान-आधारित सूची से अधिक व्यापक सिद्ध होती है, जिसका यह अनुसरण करती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- tulyanindāstutir maunīतुल्यनिन्दास्तुतिः मौनी
- निन्दा और स्तुति में समान, मौन रहने वाला (tulya-nindā-stutiḥ + maunī)
- santuṣṭo yena kenacitसन्तुष्टो येन केनचित्
- जो कुछ मिल जाए उसी से संतुष्ट (santuṣṭaḥ + yena + kenacit)
- aniketaḥ sthiramatirअनिकेतः स्थिरमतिः
- बिना घर का, स्थिर बुद्धि वाला (aniketaḥ + sthira-matiḥ)
- bhaktimān me priyo naraḥभक्तिमान् मे प्रियो नरः
- भक्ति से युक्त वह मनुष्य मुझे प्रिय है (bhakti-mān + me + priyaḥ + naraḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Verse 13 asked for balance between pleasure and pain specifically; this verse widens the same demand to “whatever comes” — the general case, not just the one pair of opposites already handled. That widening is the harder test: a balance that only holds for the situations you rehearsed for isn’t yet the balance this chapter is actually describing.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी एक विशेष कठिन बात से शांति बना लें, तो परखें कि वह शांति केवल उसी एक स्थिति में नहीं, बल्कि सामान्य रूप से हर परिस्थिति में टिकती है या नहीं — समभाव का अधिक कठिन और अधिक पूर्ण रूप वही है जो हर परिस्थिति पर लागू हो।
व्यावसायिक
- जब आपकी टीम किसी एक विशेष प्रकार की असफलता को शांति से संभालने लगे, तो जाँचें कि क्या वह संयम उससे असंबंधित दूसरी तरह की बाधाओं में भी बना रहता है — यही असली परीक्षा है कि अनुशासन सचमुच जड़ पकड़ चुका है या नहीं, केवल पहली सफलता नहीं।
परिवार और समाज
- यदि आपने अपने पारिवारिक जीवन की किसी एक कठिन बात से शांति बना ली है, तो ध्यान दें कि क्या यह एक सच्ची स्थिरता है जो आगे जो कुछ भी आए उसमें टिकी रहेगी, या केवल उसी एक बात से बनी शांति है।
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