12.1

संस्कृत

एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥

evaṃ satatayuktā ye bhaktās tvāṃ paryupāsate ye cāpy akṣaram avyaktaṃ teṣāṃ ke yogavittamāḥ

अनुवाद

अर्जुन बोले: जो भक्त इस प्रकार निरन्तर आपमें लगे रहकर आपकी उपासना करते हैं, और जो अविनाशी अव्यक्त की उपासना करते हैं, उनमें से योग को सबसे अच्छी तरह जानने वाले कौन हैं?

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

अर्जुन अध्याय का आरम्भ एक तुलनात्मक प्रश्न से करते हैं, किसी नए सिद्धान्त की माँग से नहीं। अध्याय 7-11 में साकार, व्यक्त कृष्ण का वर्णन हुआ है और अध्याय 8 से अव्यक्त अक्षर ब्रह्म की चर्चा चल रही है; इन दोनों में से किसकी उपासना करने वाला भक्त “योग को अधिक जानने वाला” (योगवित्तमाः) है? अर्जुन के इसे सही-गलत के चुनाव के बजाय श्रेणी-क्रम के रूप में रखने से कृष्ण का उत्तर किसी एक निर्णय के बजाय एक क्रमबद्ध संरचना का रूप ले लेता है। अर्जुन इसे सही-गलत के चुनाव के रूप में नहीं, बल्कि श्रेणी-क्रम के रूप में रखते हैं। इसीलिए कृष्ण का उत्तर किसी एक निर्णय के बजाय एक क्रमबद्ध संरचना है — एक पसंदीदा मार्ग, एक उतना ही मान्य पर अधिक कठिन मार्ग, और रियायतों की चार सीढ़ियाँ।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

evaṃ satatayuktā yeएवं सततयुक्ता ये
इस प्रकार निरन्तर युक्त जो (evam + satata-yuktāḥ + ye)
bhaktās tvāṃ paryupāsateभक्तास् त्वां पर्युपासते
भक्त आपकी उपासना करते हैं (bhaktāḥ + tvām + paryupāsate)
ye cāpy akṣaram avyaktaṃये चाप्य् अक्षरं अव्यक्तं
और जो अक्षर अव्यक्त की भी (ye + ca + api + akṣaram + avyaktam)
teṣāṃ ke yogavittamāḥतेषां के योगवित्तमाः
उनमें कौन योग के श्रेष्ठ ज्ञाता हैं? (teṣām + ke + yoga-vit-tamāḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Arjuna doesn’t ask which path is “true” — he asks which is “more learned,” already assuming both are real and simply want to be ranked. That’s a subtler question than it looks: most real choices between two legitimate approaches aren’t about right and wrong, they’re about fit and difficulty, and Krishna will spend the rest of the chapter answering exactly that kind of question rather than the blunter one Arjuna could have asked instead.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप उन दो रास्तों की तुलना करें जिनकी ओर आप खिंचते हैं — कड़ी दिनचर्या बनाम नरम दिनचर्या, या थेरेपी बनाम अकेले में आत्म-चिंतन — तो यह पूछने से बचें कि वस्तुगत रूप से कौन-सा सबसे अच्छा है। वह पूछें जो अर्जुन का प्रश्न भीतर ही भीतर मानकर चलता है: आप वास्तव में किसे निभाते रहने में सक्षम हैं।

व्यावसायिक

  • किसी एक ढाँचे या कार्यपद्धति को दूसरी से श्रेष्ठ घोषित करने से पहले जाँच लें कि आप सचमुच सही-गलत की तुलना कर रहे हैं या उपयुक्तता की — कौन-सा तरीका "योग का अधिक जानकार" है, इसका फ़ैसला अक्सर उस तरीके की अपनी खूबियों से कहीं अधिक किसी टीम की सीमाएँ ही करती हैं।

परिवार और समाज

  • जब आपका कोई करीबी व्यक्ति आपसे अलग कोई आध्यात्मिक या आत्म-देखभाल का अभ्यास करता हो, तो उसे समझने से पहले उसे अपने अभ्यास के मुकाबले ऊँचा-नीचा न आँकें — यह पूछें कि क्या वह सचमुच उनके लिए कारगर है, वही खुला प्रश्न जिससे यह श्लोक शुरू होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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