12.2

संस्कृत

मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते । श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः ॥

mayy āveśya mano ye māṃ nityayuktā upāsate śraddhayā parayopetās te me yuktatamā matāḥ

अनुवाद

भगवान बोले — जो मुझमें मन को लगाकर, सदा युक्त रहते हुए, परम श्रद्धा से युक्त होकर मेरी उपासना करते हैं, वे मेरे मत में योग में सबसे श्रेष्ठ हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण बिना किसी हिचकिचाहट के उत्तर देते हैं: परम श्रद्धा के साथ उनके साकार रूप की भक्ति “युक्ततम” है, यानी योग में सर्वश्रेष्ठ। निर्णय पहले सुनाया जाता है। इसके पीछे का तर्क, कि देहधारी प्राणियों के लिए यह मार्ग सरल क्यों है, श्लोक 5 में जाकर आता है। उससे पहले श्लोक 3-4 में दूसरे विकल्प का वर्णन किया जाता है। निर्णय पहले और बिना किसी देर के आता है: श्रद्धया परया, यानी “परम श्रद्धा” के साथ साकार रूप की भक्ति युक्ततम है, योग में सर्वश्रेष्ठ। इसका कारण, कि देहधारी प्राणियों के लिए यह सरल क्यों है, गीता 12.5 में ही आता है, जब दूसरा विकल्प सामने रखा जा चुका होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

mayy āveśya mano ye māṃमय्य् आवेश्य मनो ये मां
जो मुझमें मन लगाकर मुझे (mayi + āveśya + manaḥ + ye + mām)
nityayuktā upāsateनित्ययुक्ता उपासते
सदा मुझसे जुड़े रहकर उपासना करते हैं (nitya-yuktāḥ + upāsate)
śraddhayā parayopetāsश्रद्धया परयोपेतास्
परम श्रद्धा से युक्त (śraddhayā + parayā + upetāḥ)
te me yuktatamā matāḥते मे युक्ततमा मताः
वे मेरे मत में योग में सबसे श्रेष्ठ हैं (te + me + yuktatamāḥ + matāḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna could have opened with the argument and let the verdict fall out at the end; instead he states the verdict and makes the reader wait for the reasoning. Conviction doesn’t always arrive last in a person’s mind either — sometimes you know which choice is right before you can fully say why, and the honest move is to say so rather than manufacture reasoning you don’t yet have.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आपको पहले से ही विश्वास हो कि आपके लिए कौन-सा विकल्प सही है, तो उस पर अमल करने से पहले पूरे औचित्य की प्रतीक्षा न करें — दृढ़ विश्वास अपने पूरे तर्क से पहले आ सकता है, बशर्ते आप ईमानदारी से यह स्वीकार करते रहें कि तर्क अभी पीछे-पीछे आ रहा है।

व्यावसायिक

  • समय के दबाव में किसी निर्णय की पैरवी करते समय, उसके पक्ष में पूरा तर्क तैयार करने से पहले ही अपनी सिफ़ारिश साफ़-साफ़ कह दें — स्पष्ट निष्कर्ष और उसके बाद सहायक तर्क, अक्सर उस तर्क से अधिक प्रभावी होता है जो बिल्कुल अंत में जाकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचता है।

परिवार और समाज

  • यदि आप पूरी व्याख्या तैयार करने से पहले ही किसी को बताते हैं कि आपके विचार से उन्हें क्या करना चाहिए, तो यह बात सीधे-सीधे कह दें — पूरे तर्क के बिना दृढ़ विश्वास व्यक्त करना बेईमानी नहीं है, बेईमानी यह दिखावा करना है कि तर्क पहले से ही पूरा था।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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