12.18

संस्कृत

समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयोः । शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः ॥

samaḥ śatrau ca mitre ca tathā mānāpamānayoḥ śītoṣṇasukhaduḥkheṣu samaḥ saṅgavivarjitaḥ

अनुवाद

जो शत्रु और मित्र के प्रति समान है, और उसी प्रकार मान और अपमान में भी, जो सर्दी-गर्मी और सुख-दुःख में समान रहता है और आसक्ति से रहित है,

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

पूरे अध्याय में स्थितप्रज्ञ के चित्रण से यही सबसे स्पष्ट समानता है — शत्रु और मित्र, मान और अपमान, सर्दी और गर्मी, सुख और दुःख, ये सब ऐसे जोड़ों के रूप में गिनाए गए हैं जिन्हें भक्त एक समान रखता है। यह मूल रूप से समता की वही कसौटी है जिससे गीता 2.56-57 स्थिर प्रज्ञा को परिभाषित करते हैं, पर यहाँ उसका उपयोग भक्ति को परिभाषित करने के लिए हुआ है। यही इस अध्याय का अंतर्निहित तर्क है: भक्ति और स्थितप्रज्ञ भले ही अलग-अलग अभ्यासों से शुरू होते हों, वे एक ही आंतरिक अनुशासन पर आकर मिलते हैं। यह स्थितप्रज्ञ के चित्रण से सबसे स्पष्ट समानता है — शत्रु/मित्र, मान/अपमान, गर्मी/सर्दी, सुख/दुःख, सब एक समान रखे जाते हैं। अध्याय का अंतर्निहित तर्क: भक्ति और स्थितप्रज्ञ अलग-अलग आरंभिक अभ्यासों से चलकर एक ही आंतरिक अनुशासन पर आकर मिलते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

samaḥ śatrau ca mitre caसमः शत्रौ च मित्रे च
शत्रु और मित्र में समान (samaḥ + śatrau + ca + mitre + ca)
tathā mānāpamānayoḥतथा मानापमानयोः
तथा मान और अपमान में (tathā + māna-apamānayoḥ)
śītoṣṇasukhaduḥkheṣu samaḥशीतोष्णसुखदुःखेषु समः
सर्दी-गर्मी और सुख-दुःख में समान (śīta-uṣṇa-sukha-duḥkheṣu + samaḥ)
saṅgavivarjitaḥसङ्गविवर्जितः
आसक्ति से रहित (saṅga-vivarjitaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

By this point the portrait of the devotee and the earlier portrait of the sthitaprajna are naming the same person in different vocabulary — foe and friend, honor and dishonor, heat and cold, all held level either way. Two paths that looked separate at the start of the chapter turn out, verse by verse, to converge on one identical internal discipline.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • यदि कोई अभ्यास, जो आपके पहले आज़माए हुए अभ्यास से बिल्कुल अलग लगता है, फिर भी उसी भीतरी स्थिरता की माँग करता प्रतीत हो, तो उस पर भरोसा करें — बाहर से अलग दिखने वाले दो अनुशासन भीतर की एक ही अवस्था तक पहुँच सकते हैं।

व्यावसायिक

  • जब दो टीमें एक साझा समस्या को साफ़ तौर पर अलग-अलग तरीक़ों से हल करें, तो यह मान लेने से पहले कि एक तरीक़ा सही ही होगा और दूसरा ग़लत, जाँच लें कि कहीं दोनों वास्तव में एक ही मूल गुण — विश्वसनीयता, सरलता — तक तो नहीं पहुँची हैं।

परिवार और समाज

  • यदि आप और आपका कोई क़रीबी तनाव को बाहर से बहुत अलग दिखने वाले तरीक़ों से सँभालते हैं, तो देखें कि कहीं आप दोनों वास्तव में एक ही भीतरी शांति की ओर तो नहीं बढ़ रहे — अलग-अलग अभ्यास एक ही सच्चे लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं।

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