संस्कृत
यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति । शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः ॥
yo na hṛṣyati na dveṣṭi na śocati na kāṅkṣati śubhāśubhaparityāgī bhaktimān yaḥ sa me priyaḥ
अनुवाद
जो न हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न कामना करता है, जो शुभ और अशुभ दोनों का त्याग कर चुका है, ऐसा भक्तिमान व्यक्ति मुझे प्रिय है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
एक ही पंक्ति में चार युग्मित निषेध (हर्ष/द्वेष, शोक/कामना) लगभग गीता 2.56-57 के वीतराग सूत्र का संक्षिप्त पुनर्कथन लगते हैं, जिसे अब “शुभ और अशुभ का त्याग करने वाला” (शुभाशुभपरित्यागी) कहकर नैतिक स्तर तक बढ़ाया गया है — यह नैतिकता के प्रति उदासीनता नहीं, बल्कि सही या गलत कर्म कर चुकने के परिणाम के प्रति अनासक्ति है, जो श्लोक 11 से चली आ रही फलत्याग की थीम के अनुरूप है। चार युग्मित निषेध गीता 2.56–गीता 2.57 के वीतराग सूत्र को संक्षेप में कहते हैं, अब शुभाशुभपरित्यागी के साथ — यह नैतिकता के प्रति उदासीनता नहीं, बल्कि सही या गलत कर्म कर चुकने के परिणाम के प्रति अनासक्ति है, जो गीता 12.11 से चली आ रही फल-त्याग (त्याग) की थीम के अनुरूप है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yo na hṛṣyati na dveṣṭiयो न हृष्यति न द्वेष्टि
- जो न हर्षित होता है, न द्वेष करता है (yaḥ + na + hṛṣyati + na + dveṣṭi)
- na śocati na kāṅkṣatiन शोचति न काङ्क्षति
- न शोक करता है, न कामना करता है (na + śocati + na + kāṅkṣati)
- śubhāśubhaparityāgīशुभाशुभपरित्यागी
- शुभ और अशुभ का परित्याग करने वाला (śubha-aśubha-parityāgī)
- bhaktimān yaḥ sa me priyaḥभक्तिमान् यः स मे प्रियः
- जो भक्ति से युक्त है, वह मुझे प्रिय है (bhakti-mān + yaḥ + saḥ + me + priyaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
“Renouncing good and evil” sounds, out of context, like moral indifference — but the verse has spent its first three clauses on delight, hatred, and desire, not on right and wrong themselves. What’s released here is attachment to having been praised or blamed for an outcome, not the underlying judgment of whether the outcome was actually good.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप परिणामों से न चिपकने का अभ्यास करें, तो ध्यान रखें कि छोड़ना चिपकाव को है, अपनी नैतिकता को नहीं — आप सही करने की पूरी परवाह करते हुए भी उसके लिए प्रशंसा या दोष पाने की अपनी चाह को छोड़ सकते हैं।
व्यावसायिक
- जब आपको किसी अच्छे निर्णय का श्रेय पाने की या किसी बुरे निर्णय पर दोष से बचाव की ज़रूरत न रहे, तब भी सही और गलत के बारे में अपनी वास्तविक परख को पूरी तरह बनाए रखें — आप परिणाम के प्रति आसक्ति छोड़ रहे हैं, वह मानदंड नहीं जिससे उसे परखा जाता है।
परिवार और समाज
- जब आप किसी पारिवारिक मतभेद में यह हिसाब रखना छोड़ देते हैं कि कौन सही था, तो यह इस बात से अलग है कि आपको अब इसकी परवाह ही न रहे कि वास्तव में न्यायसंगत क्या है — आप अपने मूल्यों को छोड़े बिना हिसाब रखना छोड़ सकते हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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