12.10

संस्कृत

अभ्यासेऽप्यसमर्थोऽसि मत्कर्मपरमो भव । मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥

abhyāse 'py asamartho 'si matkarmaparamo bhava madartham api karmāṇi kurvan siddhim avāpsyasi

अनुवाद

यदि तुम अभ्यास में भी असमर्थ हो, तो मेरे लिए कर्म करने में तत्पर हो जाओ। मेरे लिए कर्म करते हुए भी तुम सिद्धि प्राप्त करोगे।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

दूसरा सोपान: यदि निरंतर अभ्यास (श्लोक 9) आपकी पहुँच से बाहर है, तो कृष्ण के लिए किया गया कर्म भी सिद्धि, अर्थात् पूर्णता, तक ले जाता है। यह वही तर्क है जो अध्याय 2-3 के कर्मयोग का है — बाधा स्वयं कर्म नहीं है, बल्कि अपने लिए रखा गया प्रयोजन है — अब इसे स्पष्ट रूप से भक्ति के ढाँचे में समाहित कर दिया गया है। दूसरा सोपान: यदि अभ्यास पहुँच से बाहर है, तो कृष्ण के लिए किया गया कर्म भी सिद्धि तक पहुँचाता है। वही तर्क जो अध्याय 2–3 में है: बाधा कर्म नहीं, बल्कि अपने लिए रखा गया प्रयोजन है — अब इसे स्पष्ट रूप से भक्ति के ढाँचे में समाहित कर दिया गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

abhyāse 'py asamartho 'siअभ्यासे ऽप्य् असमर्थो ऽसि
यदि तुम अभ्यास में भी असमर्थ हो (abhyāse + api + asamarthaḥ + asi)
matkarmaparamo bhavaमत्कर्मपरमो भव
मेरे लिए कर्म करने में तत्पर हो जाओ (mat-karma-paramaḥ + bhava)
madartham api karmāṇi kurvanमदर्थं अपि कर्माणि कुर्वन्
मेरे लिए कर्म करते हुए भी (mat-artham + api + karmāṇi + kurvan)
siddhim avāpsyasiसिद्धिं अवाप्स्यसि
तुम सिद्धि प्राप्त करोगे (siddhim + avāpsyasi)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The discipline offered here — act, but not for your own sake — is not a new idea; it’s karma yoga from chapters 2 and 3, reappearing without announcement inside a devotional frame. The Gita’s teachings recombine more than they multiply: a discipline learned once tends to resurface, largely unchanged, wherever it’s needed again.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • यदि कोई अनुशासन, जिसे आप पहले से जानते हैं — व्यक्तिगत श्रेय की चाह के बिना कर्म करना — किसी नए लक्ष्य से, जिसके पीछे आप लगे हैं, असंबंधित लगता है, तो फिर से देखें। संभवतः यह वही कौशल है जो किसी दूसरे नाम से फिर सामने आ रहा है, कोई नया कौशल नहीं जिसे आपको अभी सीखना बाकी हो।

व्यावसायिक

  • किसी अपरिचित क्षेत्र में काम शुरू करते समय पहले यह जाँच लें कि जो अनुशासन आप कहीं और पहले से निभाते हैं — निर्णयों को लिखित रूप में दर्ज करना, श्रेय बाँटना — क्या वह यहाँ सीधे लागू होता है, बजाय यह मान लेने के कि आपको बिल्कुल नए तरीके की ज़रूरत है।

परिवार और समाज

  • यदि आप किसी एक रिश्ते में निःस्वार्थ भाव से कर्म करना पहले से जानते हैं, तो भरोसा रखें कि वही मूल अनुशासन किसी दूसरे रिश्ते में भी सीधे काम आता है, जो अभी अधिक कठिन लगता है — वहाँ भी आप शून्य से शुरुआत नहीं कर रहे हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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