संस्कृत
ये त्वक्षरमनिर्देश्यमव्यक्तं पर्युपासते । सर्वत्रगमचिन्त्यं च कूटस्थमचलं ध्रुवम् ॥
ye tv akṣaram anirdeśyam avyaktaṃ paryupāsate sarvatragam acintyaṃ ca kūṭastham acalaṃ dhruvam
अनुवाद
परन्तु जो लोग अनिर्देश्य, अव्यक्त, सर्वव्यापी, अचिन्त्य, कूटस्थ, अचल और ध्रुव अक्षर की उपासना करते हैं,
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 3-4 अर्जुन के प्रश्न में बताए गए दूसरे मार्ग का वर्णन करते हैं — अक्षर, अर्थात् वह अव्यक्त परम तत्त्व जिसकी चर्चा अध्याय 8 में ब्रह्म के विवरण में पहले ही हो चुकी है। यह वर्णन किसी सकारात्मक गुण के बजाय निषेधों और लगभग-निषेधों (अविनाशी, अनिर्वचनीय, अव्यक्त, अचिन्त्य) की एक शृंखला है। गीता में जहाँ भी निराकार परम तत्त्व का प्रसंग आता है, वहाँ उसका वर्णन इसी तरह किया जाता है। अव्यक्त का वर्णन पूरी तरह निषेध के द्वारा किया गया है — अनिर्देश्य (जिसका निर्देश न किया जा सके), अचिन्त्य (जिसका चिंतन न किया जा सके), अव्यक्त (जो प्रकट नहीं है)। निराकार परम तत्त्व के वर्णन में गीता लगातार यही निषेधमूलक पद्धति अपनाती है। यह वही अक्षर है जिसका वर्णन गीता 8.20–गीता 8.21 में हुआ है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- ye tv akṣaram anirdeśyamये त्व् अक्षरं अनिर्देश्यं
- परन्तु जो अनिर्देश्य अक्षर की (ye + tu + akṣaram + anirdeśyam)
- avyaktaṃ paryupāsateअव्यक्तं पर्युपासते
- अव्यक्त की उपासना करते हैं (avyaktam + paryupāsate)
- sarvatragam acintyaṃ caसर्वत्रगं अचिन्त्यं च
- सर्वव्यापी और अचिन्त्य (sarvatra-gam + acintyam + ca)
- kūṭastham acalaṃ dhruvamकूटस्थं अचलं ध्रुवं
- कूटस्थ, अचल, ध्रुव (kūṭa-stham + acalam + dhruvam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The unmanifest gets nine words here and every one of them is a negation. That’s not evasion — some things (the absolute, a person’s inner life, a hard decision not yet made) are genuinely easier to bound by what they refuse to be than to pin down by what they positively are, and this verse trusts that a true description doesn’t need a positive shape to be complete.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप अभी यह नहीं कह पाते कि आप वास्तव में क्या चाहते हैं — करियर में, किसी रिश्ते में, अपने आप से — तो शुरुआत यह सूची बनाकर करें कि आप निश्चित रूप से क्या नहीं चाहते। किसी चीज़ का आकार अक्सर उसके केंद्र से दिखने से पहले उसकी सीमा से दिखने लगता है।
व्यावसायिक
- किसी अस्पष्ट परियोजना का दायरा तय करते समय, उसमें क्या शामिल है यह परिभाषित करने की कोशिश से पहले लिख लें कि स्पष्ट रूप से क्या उसके दायरे से बाहर है — नकारात्मक सीमाएँ अक्सर शून्य से शुरू की गई सकारात्मक रूपरेखा की तुलना में अधिक जल्दी स्पष्टता लाती हैं।
परिवार और समाज
- परिवार के साथ कोई दृढ़ सीमा तय करते समय, यह ठीक है कि आप पहले यह बताएँ कि आप क्या स्वीकार नहीं करेंगे, भले ही आपने अभी पूरा सकारात्मक विकल्प तय न किया हो — वह सीमा अपने आप में ही वास्तविक प्रगति है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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