18.56

संस्कृत

सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः । मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम् ॥ ५६ ॥

sarva-karmāṇy api sadā kurvāṇo mad-vyapāśrayaḥ mat-prasādād avāpnoti śāśvataṃ padam avyayam

अनुवाद

सदा सब कर्म करता हुआ भी, मेरा आश्रय लेने वाला मनुष्य मेरी कृपा से शाश्वत, अविनाशी पद को प्राप्त कर लेता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

भक्त निरंतर “सभी कर्म” करता रहता है, और पूरे समय कृष्ण पर ही निर्भर रहता है — और केवल उसी कृपा से वह “शाश्वत अविनाशी पद” को प्राप्त करता है। इससे वह चक्र पूरा होता है जो अध्याय 3 में शुरू हुआ था: समस्या कभी कर्म नहीं था, बल्कि आसक्ति और अपने ही बल पर निर्भरता थी। व्यक्ति संसार में पूरी तरह सक्रिय रह सकता है, जबकि मुक्ति देने वाला वास्तविक कार्य स्वयं कर्मों से नहीं, बल्कि कृपा से होता है। सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणः — “सभी कर्म सदा करते हुए” — और फिर भी अविनाशी पद तक पहुँचना, कृपा से (मत्प्रसादात्)। यह निष्क्रियतावाद को गीता का अंतिम अस्वीकार है: पूरी तरह संलग्न, पर समर्पित।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

sarva-karmāṇy api sadā kurvāṇoसर्व-कर्माण्य् अपि सदा कुर्वाणो
सदा सभी कर्म करते हुए भी (sarva-karmāṇi + api + sadā + kurvāṇaḥ)
mad-vyapāśrayaḥमद्-व्यपाश्रयः
मेरी शरण लेकर (mat-vyapāśrayaḥ)
mat-prasādād avāpnotiमत्-प्रसादाद् अवाप्नोति
मेरी कृपा से प्राप्त करता है (mat-prasādāt + avāpnoti)
śāśvataṃ padam avyayamशाश्वतं पदं अव्ययं
शाश्वत, अविनाशी पद (śāśvatam + padam + avyayam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Sadā — “ever,” “always” — is doing real work here: this isn’t describing occasional acts of surrendered action interspersed with ordinary self-interested ones, it’s describing one continuous mode sustained across everything a person does. The promise attaches not to a special category of sacred action but to the whole undifferentiated stream of “all actions,” performed the same way, all the time.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • अपना सबसे अच्छा, सबसे समर्पित प्रयास केवल उन्हीं क्षणों के लिए बचाकर न रखें जो महत्वपूर्ण लगते हैं — असली अभ्यास है साधारण और महत्वपूर्ण, दोनों तरह के कामों में लगातार एक ही तरह से उपस्थित रहना, न कि ख़ास मौक़ों के लिए अपना ढंग बदल लेना।

व्यावसायिक

  • परिणामों से अनासक्ति को ऐसी चीज़ न समझें जिसे आप केवल बड़े दाँव वाले निर्णयों के लिए चालू करते हैं — दबाव में जो अनुशासन सचमुच टिकता है, वह वही है जिसका अभ्यास रोज़मर्रा के कामों में भी लगातार किया गया हो।

परिवार और समाज

  • अपनी पूरी उपस्थिति परिवार के बड़े अवसरों के लिए बचाकर न रखें और साधारण दिनों को आधे-अधूरे मन से न गुज़ार दें — जो स्थिरता किसी रिश्ते को सफल बनाती है, वह लगातार बनाए रखी गई स्थिरता है, न कि वह जो केवल तब के लिए रखी जाए जब बात स्पष्ट रूप से मायने रखती हो।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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